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दिल्ली का ‘दिल’ Connaught Place: जानिए क्यों रखा गया इसका ये शाही नाम

Connaught Place : दिल्ली का कनॉट प्लेस (Connaught Place) सिर्फ एक मार्केट नहीं, बल्कि राजधानी की पहचान है। यहां आते ही आपको चमचमाती दुकानों से लेकर पुराने ब्रिटिश दौर की झलक मिल जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस जगह का नाम “कनॉट प्लेस” आखिर रखा क्यों गया? इसका रिश्ता सीधे ब्रिटिश शाही परिवार से जुड़ा है।

शाही नाम की दिलचस्प कहानी

“Connaught” नाम दरअसल आयरलैंड के चार प्रांतों में से एक प्रांत का नाम है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भारत में जब नई दिल्ली की योजना बनाई जा रही थी, तब अंग्रेजी सरकार ने इस व्यावसायिक केंद्र को एक खास नाम देने का फैसला किया। यह नाम ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य ‘ड्यूक ऑफ कनॉट एंड स्ट्रैथर्न’ यानी प्रिंस आर्थर के सम्मान में रखा गया था।

कब और कैसे मिला यह नाम

साल 1921 में प्रिंस आर्थर भारत यात्रा पर आए थे। वे क्वीन विक्टोरिया के तीसरे पुत्र और किंग जॉर्ज VI के चाचा थे। उनके आगमन के उपलक्ष्य में, नई दिल्ली में बन रहे इस भव्य बाजार का नाम “Connaught Place” रखा गया। यह डिजाइन किया था प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टोर रसेल ने, जिन्होंने इसे लंदन के रीजेंट सर्कस की तर्ज पर बनाया।

पहले कैसी थी यह जगह

आज जहां कनॉट प्लेस की चहल-पहल है, वहीं कभी यह इलाका कीकर के पेड़ों से भरा जंगल था। यहां माधोगंज, जयसिंहपुरा और राजा का बाजार नामक तीन छोटे-छोटे गांव हुआ करते थे। नई दिल्ली के निर्माण के दौरान इन गांवों को हटाकर इस क्षेत्र को विकसित किया गया, और इस तरह एक ग्रामीण क्षेत्र ब्रिटिश वास्तुकला की मिसाल बन गया।

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आज का कनॉट प्लेस

आज का कनॉट प्लेस सिर्फ खरीदारी या ऑफिस हब नहीं है, बल्कि यह दिल्ली की जीवनशैली का प्रतीक है। यहां हर ब्रांड, हर स्वाद और हर वर्ग के लोगों के लिए कुछ न कुछ है। शायद यही वजह है कि इसे आज भी “दिल्ली का दिल” कहा जाता है।

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