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सुबह 10 बजे के बाद नाश्ता, क्या बन सकता है शुगर का कारण? जानें क्या है सच्चाई

Breakfast Timing: आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में लोग अपनी दिनचर्या में बदलाव के साथ रह रहे हैं। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप पर समय बिताना, देर से सोना और सुबह देर से उठना आम बात बन गई है। ऐसे में सुबह का नाश्ता या तो पूरी तरह स्किप हो जाता है या 10 बजे के बाद किया जाता है। सवाल उठता है: क्या देर से नाश्ता करना शुगर यानी डायबिटीज का कारण बन सकता है?

बॉडी क्लॉक और मेटाबॉलिज्म

हमारा शरीर बायोलॉजिकल क्लॉक यानी बॉडी टाइम के अनुसार काम करता है। सुबह उठते ही मेटाबॉलिज्म एक्टिव होता है और खाने से ऊर्जा बनती है। अगर यह नेचुरल साइकिल बिगड़ जाए, जैसे लंबे समय तक खाली पेट रहना या अनियमित समय पर खाना, तो इंसुलिन के काम करने के तरीके पर असर पड़ सकता है।

एक्सपर्ट की राय

होलिस्टिक डाइटिशियन और इंटीग्रेटेड न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. गीतिका चोपड़ा का कहना है कि सुबह 10 बजे नाश्ता करना डायरेक्ट शुगर का कारण नहीं बनता। शुगर इंबैलेंस ज्यादा प्रभावित होता है ब्रेकफास्ट की क्वालिटी, कैरियर रूटीन और ओवरऑल डाइट से।

सही नाश्ते की पहचान

अगर कोई सुबह केवल चाय पीकर 10-11 बजे हाई कार्ब या शुगरी फूड खाता है, तो ब्लड शुगर स्पाइक होना नेचुरल है। लंबे समय तक यह आदत रखने से इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ सकता है, खासकर PCOS या प्रीडायबिटीज वाले लोगों में। लेकिन अगर रात का डिनर हल्का हो, नींद अच्छी हो और नाश्ता प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स से भरपूर हो, तो देर से नाश्ता करना हानिकारक नहीं।

नाश्ता कब और कैसे करें

सुबह उठते ही 1 गिलास पानी पीना जरूरी है।
नाश्ते में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स शामिल करें।
चाहे ब्रेकफास्ट 8 बजे हो या 10 बजे, क्वालिटी और बैलेंस पर ध्यान दें।
नियमित दिनचर्या और सही फूड बैलेंस से न तो शुगर बढ़ती है और न मेटाबॉलिज्म डिस्टर्ब होता है।

समय से ज्यादा महत्वपूर्ण है नाश्ते की क्वालिटी और बैलेंस। लेट ब्रेकफास्ट की आदत तब सुरक्षित है, जब आप पूरे दिन का मेटाबॉलिज्म संतुलित रखें।

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