Sweets lover : भारत में मीठे का स्वाद लोगों की आदत बन चुका है। ऑनलाइन सर्वे एजेंसी लोकल सर्कल्स द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि हर 10 में से 7 शहरी भारतीय महीने में तीन या उससे अधिक बार मिठाई खाते हैं। पारंपरिक भारतीय मिठाइयों के प्रति यह लगाव पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ा है। 2024 में जहां 51 प्रतिशत लोग नियमित रूप से मिठाई खाते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 74 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
मीठा के लिए प्रेम
सर्वेक्षण के अनुसार, 26 प्रतिशत उपभोक्ता महीने में 15 से 30 बार मिठाई का सेवन करते हैं, यानी लगभग रोजाना ही मुंह मीठा करते हैं। वहीं, 22 प्रतिशत लोग महीने में 3 से 7 बार मिठाई खाते हैं। केवल 5 प्रतिशत उपभोक्ता ऐसे हैं जो बिल्कुल मिठाई नहीं खाते।
सिर्फ मिठाइयों ही नहीं, बल्कि बेकरी और पैकेज्ड मीठे उत्पादों की खपत में भी तेजी आई है। पिछले वर्ष की तुलना में इन उत्पादों का सेवन करने वालों की संख्या में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सेहत को लेकर बढ़ी जागरूकता
दिलचस्प बात यह है कि मीठा पसंद करने के बावजूद लोग अब स्वास्थ्य के प्रति भी सजग हो रहे हैं। सर्वे में 70 प्रतिशत शहरी उपभोक्ताओं ने कहा कि अगर बाजार में गुणवत्तापूर्ण और कम चीनी वाले पारंपरिक या पैकेज्ड मिठाई विकल्प उपलब्ध कराए जाएं, तो वे उन्हें अपनाने के लिए तैयार हैं।
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विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों में से एक है, और यहां चीनी की खपत लगातार बढ़ रही है। हालांकि, इसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता अभी भी सीमित है। बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों जैसे मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग को देखते हुए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोगों को चीनी की मात्रा पर नियंत्रण रखने की जरूरत है।

