CBSE : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल शुरू की है। बोर्ड ने काउंसलिंग हब एंड स्पोक स्कूल मॉडल लागू किया है। इस मॉडल का उद्देश्य है कि हर एक बच्चे को सही समय रहते परामर्श सेवाएं और मानसिक स्वास्थ्य़ से जुड़ा सहयोग मिल सके।
जानें मुख्य उद्देश्य
आज के माहौल में बच्चों पर प्रतियोगिता का दबाव, तनाव और चिंता बढ़ रही है। बच्चे अपनी समस्याएं का घर में खुलकर बात नहीं कर पाते है, और कई बच्चे ऐसे होते है जिन्हें पता ही नहीं होता है कि वह क्या चाहते है, क्या उनको करना है। इन विषयों पर ध्यान केंद्रित करते हुए सीबीएसई ने बड़ा कदम लिया है, जिसका छात्रों पर बड़ा असर देखने को मिलेगा।
यह मॉडल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सोच से लिया गया है। शिक्षा सिर्फ किताबों और अंकों तक सीमित न रहकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और जीवन कौशल को भी मजबूत करे, इसी विचार पर यह पहल बनाई गई है।
बोर्ड का कहना है कि अब स्कूलों के बीच सहयोगी नेटवर्क बनेगा, जिससे हर स्तर पर छात्रों को समय पर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहयोग मिलेगा। इस कदम से न केवल छात्रों तक काउंसलिंग सेवाओं की पहुंच आसान होगी बल्कि स्कूलों की संस्थागत क्षमता भी बढ़ेगी।
इस तरीके से काम करेगा मॉडल
इस मॉडल में दो तरह के स्कूल होंगे –
- हब स्कूल और स्पोक स्कूल
हब स्कूल
- ये मुख्य केंद्र की तरह काम करेंगे। इनके पास अनुभवी काउंसलर और प्रशिक्षित स्वास्थ्य शिक्षक होंगे।
स्पोक स्कूल
- ये हब स्कूल से जुड़े रहेंगे और हर महीने तय की गई गतिविधियों को लागू करेंगे।
हब स्कूलों के काउंसलर और स्पोक स्कूलों के काउंसलर मिलकर छात्रों के लिए गतिविधियां चलाएंगे। जैसे – मानसिक स्वास्थ्य पर वर्कशॉप, सहपाठी सीखने की गतिविधियां, ग्रुप काउंसलिंग और ज़रूरत पड़ने पर व्यक्तिगत परामर्श।
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