Indian GDP Growth Forecast: दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और बाजार की अस्थिरता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती के साथ आगे बढ़ती नजर आ रही है। रेटिंग एजेंसी केयरएज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे समय में जब कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाएं सुस्ती के दौर से गुजर रही हैं, भारत की यह रफ्तार वैश्विक स्तर पर भरोसे की मिसाल बन रही है।
केयरएज रेटिंग्स के अनुसार, महंगाई में नरमी, ब्याज दरों में कटौती और मजबूत घरेलू मांग ने ग्रोथ को सहारा दिया है। टैक्स सिस्टम में सुधार और निर्यात पर दबाव के बावजूद सर्विस सेक्टर ने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती प्रदान की है। कीमतों में नियंत्रण से आम लोगों पर महंगाई का असर कम हुआ है, जबकि आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती से कर्ज लेना सस्ता हुआ है।
केयरएज रेटिंग्स के चीफ रेटिंग ऑफिसर सचिन गुप्ता का कहना है,“भारत की घरेलू आर्थिक नींव काफी मजबूत है। बैंकिंग सेक्टर बीते एक दशक के अपने सबसे बेहतर दौर में है, जिससे निवेश और विकास को बल मिला है।”
ये चुनौतियां बढ़ा सकती हैं चिंता हालांकि विकास दर के अनुमान सकारात्मक हैं, लेकिन रिपोर्ट में कुछ अहम जोखिमों की ओर भी इशारा किया गया है
- कमजोर होता रुपया
भारतीय मुद्रा में लगातार गिरावट देखी जा रही है। रुपया न सिर्फ डॉलर, बल्कि पाउंड और यूरो के मुकाबले भी करीब 15 प्रतिशत तक कमजोर हुआ है, जिससे आयात महंगा होने की आशंका बढ़ गई है।
- विदेशी निवेश में कमी
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। जहां 2021-22 में एफडीआई करीब 44 अरब डॉलर था, वहीं 2024-25 में यह घटकर लगभग 0.5 अरब डॉलर रह गया है।
- टैरिफ वॉर का असर
वैश्विक स्तर पर बढ़ते टैरिफ वॉर से भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जिसका असर एक्सपोर्ट ग्रोथ पर पड़ने की आशंका है।
बजट 2026 से क्या हैं उम्मीदें?
1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट को लेकर बाजार और उद्योग जगत की निगाहें टिकी हुई हैं। केयरएज की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा का मानना है कि सरकार को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा देना होगा। इसके साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, किसानों को आधुनिक तकनीक और उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष फोकस जरूरी होगा।
