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स्ट्रैट होर्मुज को बंद करना ईरान के लिए आसान क्यों है? जानिए इसे बंद करने से कितने प्रतिशत ट्रैफिक में आई गिरावट

by | Mar 14, 2026 | Explainer, News Big

Strait of Hormuz Blockade Threat By Iran: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और दक्षिण एशिया में पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों में ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसकी बड़ी वजह ईरान युद्ध है। बता दें कि अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर दिया। इसके जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी देशों और इजरायल में हमले किए। नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने ईरान के नाम पहले संबोधन में स्ट्रैट होर्मुज को बंद रखने का ऐलान किया है। इसके चलते अरब देशों के कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया को सप्लाई होने वाला 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से जाता है। ऐसे में यह जानना आसान है कि आखिर स्ट्रैट होर्मुज को बंद करना ईरान के लिए इतना आसान क्यों हैं।

जहाजों की गति रहती है धीमी

स्ट्रैट होर्मुज अधिकतम करीब 95 किलोमीटर और कई जगह सिर्फ 35 किलोमीटर चौड़ा है, जबकि जहाजों के चलने वाला रास्ता कुछ हिस्सों में 10 किलोमीटर से भी कम रह जाता है। तेल और गैस से भरे टैंकर आमतौर पर धीमी रफ्तार से चलते हैं और उनका ढांचा बड़े हमलों से बचाव के लिए ज्यादा मजबूत नहीं होता, इसलिए युद्ध जैसी स्थिति में वे आसान निशाना बन सकते हैं। ऐसे में सिर्फ युद्ध की आशंका भर से भी जहाजों की आवाजाही रुक सकती है। इसके अलावा ईरान के पास बड़ी संख्या में ड्रोन, मिसाइल, तेज़ रफ्तार हमला करने वाली नौकाएं, मिनी पनडुब्बियां और समुद्री माइंस हैं, जिनकी मदद से वह इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

ईरान ड्रोन-मिसाइल से बना सकता है जहाजों को निशाना

स्ट्रैट होर्मुज के मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित रखना बेहद मुश्किल और महंगा काम माना जाता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान हर महीने बड़ी संख्या में नए ड्रोन तैयार करने की क्षमता रखता है, जिससे खतरा लगातार बना रहता है। ऐसे में तनाव या युद्ध की स्थिति में इस पूरे रास्ते को खुला और सुरक्षित रखने के लिए यूएस और उसके सहयोगी देशों को भारी सैन्य संसाधन और खर्च लगाना पड़ता है, फिर भी सौ फीसदी सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। हाल ही में अमेरिकी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी माना कि जब तक ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी है, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित रखना संभव नहीं है।

15 दिनों में 97 प्रतिशत जहाजों का ट्रैफिक हुआ कम

दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से स्ट्रैट होर्मुज एक है। यहां से वैश्विक तेल और एलएनजी सप्लाई का करीब 20% हिस्सा गुजरता है। लेकिन 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद इस रास्ते से गुजरने वाला जहाज़ी ट्रैफिक लगभग 97% तक घट गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेज़ उछाल देखा जा रहा है। यही नहीं, दुनिया के करीब 33% उर्वरक खासकर सल्फर और अमोनिया भी इसी मार्ग से भेजे जाते हैं। ऐसे में इस संकट का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि बढ़ती महंगाई और खेती-किसानी पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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