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People, planet और Progress…भारत AI में कैसे बनेगा सुपरपावर? जानें क्या है PM मोदी का @2047विज़न

by | Feb 19, 2026 | Explainer

AI Impact Summit 2026: राजधानी दिल्ली में AI Impact Summit 2026 का आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 ज्यादा राष्ट्र प्रमुखों और 500 से अधिक एआई लीडर्स की मौजूदगी में कहा, “AI आज एक अहम मोड़ पर है। यह इंसान की क्षमता बढ़ा सकता है, लेकिन सही दिशा जरूरी है। इसलिए हमारा फोकस सिर्फ इनोवेशन पर नहीं, बल्कि उसके ‘इम्पैक्ट’ (प्रभाव) पर है। ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का मतलब है तकनीक का मकसद सबका कल्याण हो; वह इंसान की मदद करे, उसे रिप्लेस न करे।” आइये जानते हैं पीएम मोदी के एआई 2047 विज़न में अमेरिका और चीन के समकक्ष कैसे सुपरपावर बन सकता है।

इस समिट से कितना AI पावरफुल बन जाएगा भारत?

एआई समिट की थीम पीपल, प्लानेट और प्रोग्रेस है। यानी यह हर इंसान के लिए होगा। समिट से भारत समेत 100+ देशों के प्रतिनिधि और AI लीडर्स से स्टार्टअप्स और रिसर्च इंस्टीट्यूट्स को कनेक्शन मिलेगा। अगले 2 सालों में भारत में करीब ₹15‑17  लाख करोड़ ($200 बिलियन) निवेश आएगा। जो भारत की अर्थव्यवस्था को बूस्ट करेगा। पीएम मोदी के विज़न 2047 तक हेल्थ, शिक्षा, एग्रीकल्चर, फाइनेंस, कॉमर्स समेत स्पेस मिशन को एआई की मदद से तेज और उसे सटीक बनाने में मदद मिलेगी। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी में भारत में 1.4 अरब से अधिक लोग और डिजिटल इंडिया परियोजना के तहत लाखों डिजिटल लेन-देन होते हैं। जो उसके सबसे बड़ा डेटा एआई सेक्टर में सहायक हो सकता है। बता दें अमेरिका हर साल AI सेक्टर में 159 बिलियन डॉलर और चीन ने एक दशक में इस सेक्टर पर 912 अरब डॉलर खर्च किया है। 

पूरी दुनिया को भारत ने क्या मैसेज दिया?

इस समिट में 30 देशों के 300 से अधिक मेहमान शामिल हुए। दुनिया के बड़े हिस्से को इस समिट से जोड़ा गया और उसका मैसेज भारत की धरती से पूरी को गया। बता दें कि अब तक अमेरिका, यूके, जर्मनी, यूएई, फ्रांस और सिंगापुर में एआई पॉलिसी, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, ऑटोमेशन, स्मार्ट सिटी टेक्नोलॉजी और ग्लोबल इनोवेशन पर एआई समिट हुए। लेकिन पीएम मोदी ने इस समिट में एआई के मानवीय हितों की रक्षा और उसके विकास का संदेश दिया। साथ ही एआई पर एकाधिकार से भी इनकार किया। उन्होंने कहा, “मेरा विजन है कि भारत AI निर्माण में दुनिया की टॉप-3 महाशक्तियों में शामिल हो। हमारे AI मॉडल ग्लोबल हों, अपनी भाषा में अरबों की सेवा करें और स्टार्टअप्स अरबों वैल्यू के साथ लाखों नौकरियां पैदा करें।”

आखिर चीन क्यों भारत के एआई समिट से चिढ़ा हुआ है?

इंडिया एआई समिट 2026 में फ्रांस, ब्राजील, नीदरलैंड्स, फीनलैंड, गुयाना, अर्मेनिया, यूएई, कजाकिस्तान, स्विट्जरलैंड,  ग्रीस, भूटान, सार्बिया, स्पेन समेत कई देशों के प्रमुख या प्रतिनिधि शामिल हुए और एआई के कार्यों में सहभागिता बताई। साथ ही नई तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन में देशों के बीच तालमेल बढ़ाना उद्देश्य था। इसका फायदा भारत के एआई इंडस्ट्री को मिलेगा। ऐसे ग्लोबल लेवल पर भारत के बढ़ते दबदबे से चीन बैचेन है। क्यों कि चीन नहीं चाहता कि भारत पड़ोसी होने के नाते उसे दक्षिण एशिया में एआई के क्षेत्र में टक्कर दें। अगर भारत के अपने एआई डेवलप होंगे तो सस्ते चीनी एआई का इस्तेमाल भारत में बंद हो जाएगा जो चीन के व्यापार को नुकसान पहुंचाएगा। मालूम हो कि चीन के पास डीपसीक, Baidu, अलीबाबा, हुवेई जैसी दिग्गज टेक कंपियां हैं। चीन के मॉडल, अभी शुरुआती स्टेज में हैं। डीपसीक R1, Enine Bot, Baidu जैसे बेसिक मॉडल पर चीन अभी काम कर रहा है। चीन AI पेटेंट करने में आगे है। 

एआई से भारत भविष्य में क्या हासिल करना चाहता है

इस समिट में दुनिया भर से आए सीईओ और उद्योगपत्तियों का कई भारतीय एआई ने ध्यान खींचा। इसमें Vibrium AI, VOGIC AI, ADNOXY, Fencio व Realfast समेत अन्य एआई शामिल हैं। भारत तमाम एआई से भविष्य में समाज, अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रतिष्ठा में सुधार करना चाहता है। साथ ही हेल्थकेयर, एजुकेशन, फाइनटेक और एग्रीकल्चर जैसे सेक्टर्स में AI अपनाकर उत्पादकता और लाभ बढ़ाना उद्देश्य है। इसके अलावा वैश्विक नीति भी बढ़ेगी। साथ ही सभी एआई स्टार्टअप के लिए विदेशी निवेश में आने की उम्मीद बनी रहेगी। उम्मीद की जा रही है कि भारत का IT सेक्टर 2030 तक 400 बिलियन डॉलर्स तक पहुंच सकता है। यह आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को मदद करेगा।

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