Former Pakistan PM Imran Khan: लाहौर की ठंडी सुबह थी 5 अक्टूबर 1952। एक समृद्ध पठान परिवार में जन्मे बच्चे का नाम रखा गया इमरान अहमद खान नियाजी। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह बच्चा एक दिन पहले क्रिकेट का विश्व विजेता कप्तान बनेगा और फिर अपने ही देश का प्रधानमंत्री।
विदेश में तैयार हुआ व्यक्तित्व
इमरान खान का बचपन लाहौर में बीता। वह पढ़ाई में औसत लेकिन खेलों में बेहद तेज थे। किशोरावस्था में ही उनका झुकाव क्रिकेट की ओर साफ दिखने लगा। आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें इंग्लैंड भेजा गया, जहां उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय (केबल कॉलेज) से दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र (PPE) की पढ़ाई की। इंग्लैंड ने उनके व्यक्तित्व को निखारा और आत्मविश्वास, अंग्रेजी बोलने की शैली और अंतरराष्ट्रीय सोच यहीं विकसित हुई। लेकिन दिल में बस एक सपना था: पाकिस्तान के लिए खेलना।
संघर्ष से विश्व विजेता तक
1971 में उन्होंने पाकिस्तान के लिए टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। शुरुआत आसान नहीं थी। शुरुआती वर्षों में उन्हें टीम में जगह बनाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक तेज गेंदबाज ऑल-राउंडर के रूप में स्थापित किया। उनकी रफ्तार, स्विंग और कप्तानी की समझ अलग थी।
1992 वही साल जिसने उन्हें अमर कर दिया
ऑस्ट्रेलिया में हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की टीम शुरुआत में लगभग बाहर हो चुकी थी। लेकिन इमरान खान ने टीम को एकजुट किया और कॉर्नर्ड टाइगर्स का नारा दिया। फाइनल में पाकिस्तान ने इंग्लैंड को हराकर पहली बार विश्व कप जीत लिया। वर्ल्ड कप जीतने के बाद उन्होंने क्रिकेट से संन्यास ले लिया और यहीं से उनकी जिंदगी का दूसरा अध्याय शुरू हुआ।
शौकत खानम अस्पताल की कहानी
क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने राजनीति नहीं, बल्कि सेवा का रास्ता चुना। उनकी मां शौकत खानम कैंसर से गुज़री थीं। इस दर्द ने उन्हें झकझोर दिया। उन्होंने लाहौर में शौकत खानम मेमोरियल कैंसर अस्पताल बनाने का फैसला किया। एक ऐसा अस्पताल जहां गरीबों का मुफ्त इलाज हो। फंड जुटाने के लिए वह गांव-गांव गए, विदेशों में भाषण दिए, खुद दान मांगा। कई लोगों ने कहा कि यह असंभव है। लेकिन 1994 में अस्पताल बनकर तैयार हो गया। यहीं से उनकी छवि सिर्फ क्रिकेटर नहीं, बल्कि समाजसेवी नेता की बननी शुरू हुई।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व क्रिकेट कप्तान इमरान खान की निजी जिंदगी हमेशा चर्चा में रही है। उनकी लोकप्रियता जितनी राजनीति और क्रिकेट में रही, उतनी ही उनके विवाह और रिश्तों को लेकर भी रही। उन्होंने अपने जीवन में तीन शादियां कीं और हर रिश्ता अलग परिस्थितियों में खत्म हुआ।
पहली शादी: जेमिमा गोल्डस्मिथ (1995–2004)
इमरान खान की पहली शादी 1995 में ब्रिटेन की पत्रकार और कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाली जेमिमा गोल्डस्मिथ से हुई। उस समय इमरान लगभग 42 साल के थे और जेमिमा करीब 21 साल की थीं। शादी के बाद जेमिमा पाकिस्तान आकर लाहौर में रहने लगीं और उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया। यह रिश्ता करीब 9 साल चला। अलगाव के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। 2004 में दोनों ने आपसी सहमति से तलाक ले लिया। बाद में भी दोनों के संबंध सामान्य और सम्मानजनक बने रहे। इमरान खान की पहली बीवी से दो बच्चे हैं। सुलेमान खान, कासिम खान दोनों अपनी मां के साथ ब्रिटेन में रहते हैं।
दूसरी शादी: रेहम खान (2015)
करीब एक दशक बाद 2015 में इमरान खान ने टीवी पत्रकार रेहम खान से निकाह किया। यह शादी अचानक हुई और उतनी ही जल्दी खत्म भी हो गई। यह रिश्ता लगभग 10 महीने ही चला। अलग होने के कारणों को लेकर दोनों की तरफ से अलग-अलग बातें सामने आईं। 2015 के अंत में दोनों का तलाक हो गया और मामला काफी सार्वजनिक विवाद में भी रहा।
तीसरी शादी: बुशरा बीबी (2018)
2018 में इमरान खान ने आध्यात्मिक झुकाव रखने वाली बुशरा बीबी (बुशरा मनिका) से विवाह किया। यह शादी उनकी राजनीति के अहम दौर, चुनाव से ठीक पहले हुई थी। बुशरा बीबी को धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्तित्व माना जाता है और कहा जाता है कि इमरान खान उनके काफी करीब रहे। यह रिश्ता अब भी जारी है और वह उनकी तीसरी पत्नी हैं। इमरान खान की दूसरी और तीसरी पत्नी से कोई भी बच्चा नहीं है।
राजनीति में प्रवेश
1996 में उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI)। शुरुआत बेहद कठिन रही। 1997 के चुनाव में पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। 2002 के चुनाव में इमरान खान जीतकर नेशनल असेंबली पहुंचे। 2008 में चुनाव का बहिष्कार कर दिया। लोग उन्हें आदर्शवादी लेकिन अव्यावहारिक नेता मानते थे। वे भ्रष्टाचार के खिलाफ, न्याय व्यवस्था और “नया पाकिस्तान” की बात करते थे, लेकिन सत्ता उनसे दूर ही रही।
लोकप्रियता का उभार
2011 के बाद हालात बदलने लगे। युवाओं में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। बड़े शहरों में रैलियां होने लगीं। सोशल मीडिया ने उन्हें नया राजनीतिक चेहरा बना दिया। उनका मुख्य एजेंडा था। भ्रष्टाचार विरोध, कल्याणकारी राज्य, इस्लामी सामाजिक न्याय की अवधारणा।
प्रधानमंत्री बनने का सफर
2018 के आम चुनाव में उनकी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 18 अगस्त 2018 को इमरान खान पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने नया पाकिस्तान का नारा दिया।
सत्ता से हटना और टकराव
2022 में उनके खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव आया और वे प्रधानमंत्री पद से हट गए। इसके बाद राजनीति और ज्यादा टकरावपूर्ण हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत हटाया गया, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया। इसके बाद बड़े-बड़े विरोध प्रदर्शन हुए। कई कानूनी मामलों में उनका नाम आया। उन्हें गिरफ्तार भी किया गया और यहीं से वे पाकिस्तान की राजनीति के सबसे विवादित लेकिन सबसे लोकप्रिय नेताओं में गिने जाने लगे।
किन-किन मामलों में हुई इमरान खान की गिरफ्तारी
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान 2023 से कई मामलों में कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं और अलग-अलग केसों में उन्हें गिरफ्तार किया गया है और सजा सुनाई गई है।
तोशाखाना केस
प्रधानमंत्री रहते हुए उन्हें विदेश यात्राओं के दौरान दूसरे देशों के नेताओं से महंगे गिफ्ट मिले थे — जैसे घड़ियां, ज्वेलरी आदि।आरोप है कि उन्होंने ये तोहफे सरकारी रिकॉर्ड में सही कीमत पर घोषित नहीं किए और बाद में कम कीमत दिखाकर खरीदकर बेच दिए। इसी मामले में 2023 में उन्हें सजा हुई और जेल भेजा गया (बाद में कुछ मामलों में राहत भी मिली, लेकिन केस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ)।
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट
यह सबसे गंभीर मामला माना गया। इमरान खान ने एक कथित राजनयिक गोपनीय दस्तावेज (अमेरिका से जुड़ा कूटनीतिक संदेश) सार्वजनिक रैलियों में लहराया और दावा किया कि विदेशी साजिश से उनकी सरकार गिराई गई। सरकार ने उन पर गोपनीय सरकारी दस्तावेज लीक करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया। इसी केस में भी उन्हें सजा सुनाई गई।
इद्दत निकाह केस
उनकी तीसरी शादी बुशरा बीबी से हुई थी। आरोप लगाया गया कि शादी इस्लामी कानून के अनुसार “इद्दत अवधि” पूरी होने से पहले कर ली गई। इस मामले में भी अदालत ने उन्हें और उनकी पत्नी को सजा सुनाई।
भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के आरोप
इस केस में आरोप है कि एक प्रॉपर्टी डील से जुड़े अरबों रुपये के लाभ के बदले उनकी संस्था (अल-कादिर ट्रस्ट) को जमीन दी गई। पाकिस्तान की एंटी-करप्शन एजेंसी NAB ने इसे क्विड-प्रो-क्वो भ्रष्टाचार बताया। यह केस अभी भी सबसे अहम जांचों में शामिल है।
हिंसा और दंगा भड़काने के केस
2023 में उनकी गिरफ्तारी के बाद पूरे पाकिस्तान में भारी हिंसा हुई। सेना के ठिकानों और सरकारी इमारतों पर हमले हुए। सरकार ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी PTI के नेताओं और समर्थकों को उकसाने में उनकी भूमिका थी, इसलिए उन पर आतंकवाद-संबंधी और दंगा भड़काने के कई मुकदमे दर्ज हुए।

