Param Sundari Movie Review : बॉलीवुड की नई रिलीज़ “परम सुंदरी” दर्शकों के सामने एक रोमांटिक कॉमेडी के तौर पर पेश की गई थी, लेकिन फिल्म देखने के बाद यह साफ हो जाता है कि यह न तो रोमांस छू पाती है और न ही कॉमेडी। निर्देशक तुषार जलोटा की इस फिल्म में जान्हवी कपूर (मेकअपिटा सुंदरी) और सिद्धार्थ मल्होत्रा (परम) मुख्य भूमिकाओं में नज़र आए हैं, मगर कहानी और प्रस्तुति इतनी कमजोर है कि दर्शक शुरुआत से ही ऊबने लगते हैं।
क्या है कहानी की झलक
फिल्म की पृष्ठभूमि केरल के छोटे कस्बे नांगियारकुलंगरा में दिखाई गई है। यहां एक होमस्टे चलाने वाली मेकअपिटा सुंदरी (जान्हवी कपूर) रहती हैं, जो अनाथ हैं और अपनी छोटी बहन अम्मू की देखभाल करती हैं। कहानी में दिल्ली का अमीर पंजाबी लड़का परम (सिद्धार्थ मल्होत्रा) आता है, और वहीं से शुरू होता है एक अधूरा-सा रोमांटिक ट्रैक।
निर्माताओं ने फिल्म को “संस्कृति टकराव” और “रोमांटिक कॉमेडी” की तरह पेश करने की कोशिश की है, लेकिन इसमें ज्यादातर समय दक्षिण भारतीय पहचान और परंपराओं का मजाक उड़ाया गया है। फिल्म लगातार मुंडू/लुंगी चुटकुलों, नारियल के प्रतीकों और नकली उच्चारण वाले संवादों में फंसी रह जाती है।
अभिनय और किरदार
जान्हवी कपूर का किरदार एक ओर तो पारंपरिक दिखाया गया है, लेकिन उनकी मलयालम भाषा और उच्चारण इतने अप्राकृतिक लगते हैं कि दर्शक तुरंत कनेक्ट नहीं कर पाते। सिद्धार्थ मल्होत्रा का रोल भी उतना ही अधूरा है। न रोमांटिक अपील दिखती है और न ही कॉमिक टाइमिंग।
संजय कपूर और रेन्जी पनिकर जैसे कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद, फिल्म का लेखन इतना कमजोर है कि उनके किरदार भी बेजान से लगते हैं।
कमजोर लेखन और निर्देशन
फिल्म के लेखक अर्श वोरा, जिन्होंने पहले मीनाक्षी सुंदरेश्वर फिल्म लिखी हैं, इस बार भी दर्शकों को नया कुछ नहीं दे पाए। कहानी भर-भरकर स्टीरियोटाइप्स और घिसी-पिटी स्थितियों से भरी हुई है। फिल्म में बार-बार दिखाई जाने वाली बारिश, गीली साड़ी के सीन, और ओवरड्रामैटिक क्लोज-अप शॉट्स सिर्फ बोरियत पैदा करते हैं।
तकनीकी पक्ष
केरल की खूबसूरत लोकेशन फिल्म में जरूर नज़र आती हैं, लेकिन उन्हें केवल “विदेशीपन” दिखाने के लिए इस्तेमाल किया गया है। (Param Sundari Movie Review) हर सीन में ज़्यादा जोर देकर “दक्षिण भारतीयता” दिखाने की कोशिश की गई है, जिससे असर उल्टा हो जाता है।
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दर्शकों की प्रतिक्रिया
फिल्म को लेकर मलयाली दर्शकों और सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है। लोगों ने इसे “सांस्कृतिक मजाक” और “थकाऊ रोमांटिक कॉमेडी” करार दिया है। हालांकि, यही मीम्स फिल्म की एकमात्र “मनोरंजक” चीज़ साबित हुए हैं।

