Alia Bhatt BAFTA Hindi speech: ब्रिटिश एकेडमी फिल्म अवॉर्ड्स यानी ब्रिटिश अकादमी फ़िल्म पुरस्कार के मंच पर भारतीय अभिनेत्री आलिया भट्ट का आत्मविश्वास भरा ‘नमस्कार’ इस बार चर्चा का केंद्र बन गया। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच हिंदी में दिए गए उनके संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली संबोधन ने भारतीय सिनेमा की उपस्थिति को मजबूत संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान उनका संतुलित व्यक्तित्व और स्पष्ट अभिव्यक्ति दर्शकों को प्रभावित करती नजर आई।
हिंदी में अभिवादन, भारतीय पहचान पर जोर
आलिया भट्ट ने अपने संबोधन की शुरुआत हिंदी शब्द ‘नमस्कार’ से की। यह कदम प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय भाषा का प्रयोग सांस्कृतिक आत्मविश्वास को दर्शाता है। उन्होंने भारतीय सिनेमा के विकास, वैश्विक सहयोग और रचनात्मक साझेदारी पर संक्षिप्त टिप्पणी की। उनके शब्दों में भारतीय कलाकारों की बढ़ती वैश्विक भागीदारी का संदेश साफ झलकता था।
वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा की मौजूदगी
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फिल्मों और कलाकारों की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हुई है। ओटीटी प्लेटफॉर्म और वैश्विक वितरण नेटवर्क के कारण भारतीय कंटेंट अधिक व्यापक दर्शकों तक पहुंच रहा है। ऐसे में BAFTA जैसे प्रतिष्ठित समारोह में भारतीय कलाकार की हिंदी में प्रस्तुति सांस्कृतिक विविधता को रेखांकित करती है। यह संकेत देता है कि भारतीय सिनेमा अब केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहा।
साउथ इंडस्ट्री की सराहना
कार्यक्रम में मौजूद दक्षिण भारतीय सिनेमा से जुड़ी एक अभिनेत्री ने आलिया के आत्मविश्वास और सांस्कृतिक गर्व की प्रशंसा की। दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी तकनीकी गुणवत्ता और कथा शैली के लिए पहचाना जा रहा है। ऐसे में हिंदी में दिया गया संबोधन भारतीय फिल्म उद्योग की सामूहिक पहचान को और सशक्त बनाता है।
सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘नमस्कार’ क्षण को लेकर कई प्रतिक्रियाएं सामने आईं। दर्शकों ने इसे भारतीय संस्कृति के सम्मान और आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति बताया। कई यूजर्स ने लिखा कि वैश्विक मंच पर अपनी भाषा का प्रयोग करना सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देता है।
सांस्कृतिक कूटनीति का संकेत
फिल्म समारोह केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे सांस्कृतिक संवाद का भी माध्यम बनते हैं। हिंदी में दिया गया संबोधन सांस्कृतिक कूटनीति का उदाहरण माना जा सकता है, जहां कला और भाषा के माध्यम से देश की पहचान प्रस्तुत की जाती है। यह घटना दर्शाती है कि भारतीय कलाकार अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। BAFTA के मंच पर आलिया भट्ट का “नमस्कार” केवल एक शब्द नहीं था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, भाषा और सिनेमा की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बनकर उभरा।

