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Actor darshan को बड़ा झटका: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की कमियों का हवाला देकर रद्द की जमानत

by | Aug 14, 2025 | मनोरंजन

Actor darshan : कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा दर्शन थुगुदीपा, अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और अन्य आरोपियों को दी गई जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रद्द कर दिया। अदालत ने इस उच्च न्यायालय के आदेश में गम्भीर कानूनी त्रुटिया पाईं और ज़मानत रद्द करते हुए तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं।

क्या है मामले?

दर्शन उन 17 लोगों में शामिल थे जिन्हें अपने 33 वर्षीय प्रशंसक एस रेणुकास्वामी का कथित तौर पर अपहरण और हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। रेणुकास्वामी ने कथित तौर पर दर्शन की प्रेमिका, अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा को अश्लील संदेश भेजे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़ित को तीन दिनों तक एक शेड में कैद कर क्रूर तरीके से मारपीट और शॉक दिए गए, और उसका शव बेंगलुरु के मगदी रोड इलाके में एक नाले में मिला। अगस्त सितंबर 2024 में पुलिस ने चार्जशीट दायर की, जिसमें पवित्रा को मुख्य आरोपी और दर्शन को सह आरोपी के रूप में नामित किया गया।

हाईकोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराज़गी

सुनवाई के दौरान दो-सदस्यीय बेंच न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवनने कहा कि ज़मानत का निर्णय “विवेकाधिकार के यांत्रिक और विकृत उपयोग” की अवस्था तक पहुंच गया था। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि “जो भी व्यक्ति अपराध कर चुका हो चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो वह कानून से ऊपर नहीं हो सकता।” सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के फ़ैसले की तीव्र आलोचना की थी, उसे “पक्षपाती” और “विवेकाधिकार का दुरुपयोग” बताया था।

जमानत की पूर्व स्थिति और आज का फैसला

हाईकोर्ट की मूल ज़मानत: 13 दिसंबर 2024 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने चिकित्सा आधार पर दर्शन और अन्य आरोपियों को अंतरिम ज़मानत दी थी। कर्नाटक सरकार ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई के बाद आज फैसला सुनाया गया।

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VIP व्यवहार पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने जेल में किसी भी “विशेष सुविधाओं” या “5-स्टार ट्रीटमेंट” की अनुमति देने से सख्त ऐतराज़ जताया। अदालत ने कहा कि अगर ऐसा पाया गया, तो जेल अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों को निलंबन का आदेश होगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश दर्शन थुगुदीपा, पवित्रा गौड़ा और अन्य आरोपियों के लिए एक बड़ा झटका है। जमानत रद्द होने के साथ ही उनका स्वतंत्रता प्राप्ति का मार्ग बंद हो गया है, और अब उन्हें तुरंत गिरफ्तार करना होगा। अदालत ने स्पष्ट रूप से न्यायिक प्रक्रिया की अखंडता बनाए रखने का संदेश दिया है।

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