Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर बुर्का या परदे में आने वाली महिलाओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक केंद्र पर आंगनवाड़ी सेविकाओं की तैनाती पर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों को आयोग ने स्पष्ट जवाब दिया है।
इसी के साथ आयोग ने यह स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कोई नई नहीं है बल्कि 1994 में टीएन शेषन से समय से लागू है। चुनाव आयोग इसका देश भर में सख्ती से पालन कराने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने इस दौरान चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल के दौरान बुर्का व पर्दे में रहने वाली महिलाओं की पहचान को लेकर 21 अक्टूबर 1994 में जारी आदेश भी शेयर किया है।
कुछ राजनीतिक दलों ने उठाया सवाल
जिसमें साफ कहा है कि मतदान केंद्र में आने वाले ऐसी महिलाओं की पहचान सुनिश्चित करने और सहायता के लिए मतदान केंद्रों पर महिला अधिकारी की अनिवार्य रूप से तैनाती दी जाए। आयोग ने यह स्थिति तब स्पष्ट की है जब सपा सहित कुछ राजनीतिक दलों की ओर से इस फैसले पर लगातार सवाल उठाया खड़े किए जा रहे है।
संविधान के तहत मतदाताओं की पहचान अनिवार्य
संविधान के तहत मतदान के आने वाले मतदाताओं की पहचान अनिवार्य है। इस दौरान उनकी धार्मिक परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जाएगा। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा की घोषणा के समय राजनीतिक दलों की मांग पर बुर्का व परदे में मतदान केंद्रों पर आने वाली महिलाओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं की तैनाती की घोषणा की थी।
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