Bihar Election 2025 : बिहार चुनाव को लेकर महागठबंधन में ऑल इस नोट वेल. पहले और दूसरे चरण का नामांकन बिहार में पूरा हो चुका है. बिहार की कुल 243 सीटो पैट एनडीए और महागठबंधन ने अपने अपने प्रत्याशी के नामो का ऐलान और नामांकन भी हो गया है. लेकिन एनडीए में ऑल इस सॉर्ट आउट हो चुका है लेकिन महागठबंधन में अभी भी विवाद जारी है.
सीट शेयरिंग से लेकर महागठबंधन के उम्मीदवारो तक आपसी लड़ाई जारी है. 243 सीटो में से 13 सीट ऐसी है जहाँ महागठबंधन के तीन दलों ने अपने अलग अलग प्रत्याशियों को उतारा है वही 6-7 सीट ऐसी है जहाँ कांग्रेस और आरजेडी दोनों के उम्मीदवार चुनावी मैदान में है.
बिहार चुनाव में अब कुछ दिनों का ही समय रह गया है वही एनडीए की और से चुनावी प्रचार की शुरुआत हो चुकी है , प्रधानमंत्री भी बिहार में 13-14 सभाए और चुनावी रैलियाँ की जानकारी सामने आ गई है लेकिन दूसरी और महागठबंधन में सभी बड़े नेता प्रचार में नहीं दिख रहे.
कांग्रेस और आरजेडी के बीच अब रिश्ते ठीक नहीं है जिसका असर अब प्रचार पर भी देखने को मिल रहा है. सितंबर में वोटर अधिकार यात्रा के बाद से कोई भी राजनीतिक कार्यक्रम या प्रचार महागठबंधन का नहीं हुआ. एक और राहुल गांधी दिल्ली में है वही तेजस्वी यादव के प्रचार की गति भी धीमी हो गई है जिसका कारण आपसी कलह है।
महागठबंधन में सीट शेयरिग की रार ने चुनाव प्रचार की राह थामी
समझिए पूरी जानकारी–
एक सितंबर को पटना में समाप्त हुई राहुल-तेजस्वी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद से गठबन्धन का कोई सामूहिक प्रचार नहीं। खुद राहुल ने भी बिहार प्रचार से बनाई दूरी। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने पहले चुनावी रैलियां शुरु की थीं, अब वो भी ठण्डे बस्ते में है।
* महिलाओं को अपने पाले में करने का ज़िम्मा प्रियंका गांधी ने उठाया था, लेकिन 24 सितंबर को पश्चिमी चंपारण में रैली के बाद उन्होंने भी बिहार चुनाव प्रचार से बनाई दूरी।
* बिहार के हर प्रमंडल में एक रैली का कार्यक्रम बन रहा था, जहां महागठबन्धन के नेताओं को शामिल होना था, वो भी अधर में है।
* महागठबन्धन के संयुक्त घोषणापत्र की घोषणा की गई थी, उस पर काम भी चल रहा था, वो भी फिलहाल अटका हुआ है।
* बिहार कांग्रेस के 6 नेताओं ने अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए टिकट मांगा था, वो मिला नहीं। इसलिए अंदरखाने वो भी नाखुश हैं, प्रचार अभियान में उनकी भी रुचि नहीं है।
* राहुल के साथ यात्रा के बाद तेजस्वी ने अकेले प्रचार यात्रा शुरु की थी, 20 सितंबर को वो खत्म हुई, तब से वो भी प्रचार से दूर हैं।
* पड़ोसी झारखंड से सटी सीटों पर वहां के सीएम हेमन्त सोरेन के साथ महागठबन्धन की बड़े प्रचार अभियान की तैयारी थी, लेकिन सीट बंटवारे के बाद अब वो भी एक बड़े झटके में बदल चुका है।
* इसी तरह यूपी से सटी सीटों पर अखिलेश यादव और बंगाल से सटी सीटों पर ममता बनर्जी के साथ महागठबन्धन के प्रचार का अभियान भी अभी तक अधर में ही है।कुल मिलाकर चुनाव में हार-जीत तो बाद में होगी।
लेकिन एनडीए के मुकाबले सीट बंटवारा हो या चुनाव प्रचार अभियान, महागठबन्धन मोमेंटम की लड़ाई में पिछड़ा हुआ दिख रहा है। साथ ही वोटर अधिकार यात्रा के दौरान जो ऊर्जा और आपसी समन्वय महागठबन्धन के नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच दिखा था, उनके दिलों में उपजी गांठ को मिटाना भी खासा मुश्किल होगा।
_ कनिका कटियार

