Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे जिस रफ्तार से सामने आए, उतनी ही तेज़ी से एक बात साफ हो गई जिस नीतीश कुमार को विपक्ष ‘पलटूराम’, ‘थके हुए’, ‘75 पार’ कहकर घेर रहा था, उसी नीतीश ने चुनावी गणित ऐसी उलट दी कि विपक्ष के सारे दांव धरे के धरे रह गए। NDA दो-तिहाई बहुमत के साथ 190+ सीटों पर बढ़त बनाए दिखा, जबकि महागठबंधन 50 से भी नीचे सिमटता गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह जेडीयू सीटों के मामले में बीजेपी को पीछे छोड़ती नजर आ रही है। यानी नीतीश ने न सिर्फ खुद को साबित किया, बल्कि पूरा चुनावी नैरेटिव भी बदल दिया।
नीतीश बने गेमचेंजर
चुनाव शुरू होने से पहले तेजस्वी यादव, प्रशांत किशोर और कई विपक्षी नेता लगातार नीतीश की उम्र, उनकी सेहत और उनकी राजनीतिक ‘पलटी’ पर सवाल उठा रहे थे। लेकिन नीतीश कुमार ने खुद मैदान में उतरकर यह साबित कर दिया कि न उनकी ऊर्जा घटी है, न उनकी रणनीति पुरानी पड़ी है। उन्होंने 90 से अधिक जनसभाएँ कीं, खराब मौसम में 1000 किलोमीटर सड़क मार्ग से सफर किया और प्रचार के आखिरी दिन तक फॉर्म में बने रहे।
पोस्टरों पर लिखा दिखा “टाइगर अभी ज़िंदा है।”
नीतीश की सबसे बड़ी बाज़ी
नीतीश ने शुरू से साफ कर दिया था इस बार भाजपा के साथ ही रहेंगे, किसी गठबंधन में उलटफेर नहीं होगा। यही भरोसा जनता और गठबंधन दोनों पर काम कर गया। एलजेपी (चिराग), हम (जीतन राम मांझी) और आरएलएसपी (उपेंद्र कुशवाहा) जैसे छोटे दलों को साथ रखकर नीतीश ने जो समीकरण बनाया, वह 2020 की गलतियों का सुधार था। 36% अति-पिछड़ा वर्ग का मजबूती से नीतीश के साथ खड़ा रहना, इस जीत की रीढ़ बन गया।
2020 की सबसे बड़ी बाधा
पिछले चुनाव में चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा ने अकेले चुनाव लड़कर जेडीयू को भारी नुकसान पहुँचाया था। लेकिन इस बार नीतीश ने इन दोनों को साथ रखकर पूरा खेल बदल दिया। कम सीटों पर चुनाव लड़कर भी जेडीयू बड़ी विजेता बनकर निकलती दिख रही है। तेजस्वी का युवा कार्ड, नौकरी के वादे, राहुल गांधी की रैलियाँ सब कुछ उस माहौल में फीका पड़ गया, जो नीतीश ने अपने अनुभव और ज़मीनी पकड़ से तैयार किया। विपक्ष ने भले नीतीश को ‘पलटूराम’ कहा था, लेकिन इस चुनाव में पलटा किसी और का नहीं, पूरा खेल नीतीश ने ही दिया।
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