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संविधान से लेकर आरक्षण और अब ‘वोट चोरी’ तक, कांग्रेस का नया ‘वोट रक्षक अभियान’ क्या है?

Bihar Election : विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े मुद्दों को ट्रम्प कार्ड बनाकर कैंपेन चलाए हैं। राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो यात्रा और उसके बाद की न्याय यात्रा के जरिए असमानता, किसान संकट, बेरोज़गारी और महँगाई जैसे आर्थिक अन्याय को केंद्र में रखा। इसी कड़ी में कांग्रेस ने न्याय” शब्द को अपनी राजनीति का नया प्रतीक बनाया। संविधान और आरक्षण के बाद कांग्रेस ने अब नया मुद्दा उठाया है — वोट चोरी

संविधान बचाओ अभियान

लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस ने संविधान को खतरे में बताकर केंद्र सरकार को घेरा। बीजेपी के “400 पार” नारे के बाद राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं ने बार-बार कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक ढांचा खतरे में है।

कांग्रेस ने इस मुद्दे पर देशभर में दर्जनभर से ज़्यादा संविधान बचाओ सम्मेलन किए। इन सभाओं में राहुल गांधी संविधान की किताब हाथ में लेकर मंच से बार-बार केंद्र सरकार पर हमलावर नजर आए। लंबे समय तक कांग्रेस ने इसे अपना केंद्रीय मुद्दा बनाए रखा।

आरक्षण पर दांव

संविधान बचाओ कैंपेन के साथ-साथ कांग्रेस ने आरक्षण को भी चुनावी एजेंडा बनाया। राहुल गांधी ने कई रैलियों में कहा कि 50% से अधिक आरक्षण लागू होना चाहिए और OBC वर्ग को उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इस मुद्दे को लगातार उठाकर कांग्रेस ने ओबीसी वोट बैंक में पैठ बनाने की कोशिश की।

अब “वोट चोरी” पर फोकस

संविधान और आरक्षण के बाद कांग्रेस ने अब नया मुद्दा उठाया है — वोट चोरी। हाल के महीनों में कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग को घेरते हुए कह रही है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी और धांधली हो रही है।
इस मुद्दे पर पार्टी ने देशभर में कई अभियान चलाए हैं—

  • मशाल जुलूस: बड़े पैमाने पर निकाला गया।
  • सिग्नेचर कैंपेन: जिसमें प्रियंका गांधी, सचिन पायलट और कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
  • वोट रक्षक अभियान (पायलट प्रोजेक्ट): अब बिहार चुनाव को देखते हुए शुरू किया जा रहा है।

किन सीटों पर चलेगा “वोट रक्षक अभियान”?

यह अभियान पाँच लोकसभा सीटों पर शुरू होगा—

  • राजस्थान: जयपुर ग्रामीण, अलवर
  • उत्तर प्रदेश: बासगांव
  • छत्तीसगढ़: कांकेर
  • मध्य प्रदेश: मुरैना

यहाँ उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहाँ कांग्रेस कम अंतर से हारी थी। अभियान के तहत हर 20 बूथ पर एक “वोट रक्षक” की तैनाती होगी। इनकी जिम्मेदारी होगी कि चुनाव में मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न हो।

असर की उम्मीद

कांग्रेस थिंक टैंक का मानना है कि “वोट चोरी” का नैरेटिव जनता में गूंज पैदा करेगा और विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर साथ आएंगे। पार्टी को उम्मीद है कि यह मुद्दा आगामी बिहार विधानसभा चुनावों में उसके लिए बड़ा हथियार साबित होगा।

 

 

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