Bihar Election: बिहार में चुनाव नतीजों का दिन किसी त्योहार से कम नहीं होता। सुबह EVM खुलते ही सियासी तापमान बढ़ता है, और उसके साथ ही बिहार की रसोई भी हाई अलर्ट मोड में चली जाती है। सड़कों से लेकर बाजारों और गांवों के चौक-चौराहों तक खाने की ऐसी महक फैलती है कि पूरा राज्य जश्न में डूबा नजर आता है।
शहरों में सुबह की शुरुआत
पटना, बक्सर, मुजफ्फरपुर और बेगूसराय जैसे शहरों में सुबह की शुरुआत हमेशा की तरह सत्तू और पराठों से ही होती है, लेकिन नतीजों वाले दिन इनकी डिमांड कई गुना बढ़ जाती है। दुकानों के बाहर लंबी कतारें, हाथ में मोबाइल पर लाइव रिज़ल्ट और दूसरे हाथ में सत्तू का गिलास या गर्मागरम पराठा… ये नज़ारा चुनावी रोमांच को और बढ़ा देता है। दुकानदार भी आज के दिन को सबसे “कमाऊ दिन” बताते हैं। एक दुकानदार मुस्कुराते हुए बोला- चुनाव हो और भीड़ न बढ़े? अरे साहब, आज तो दुकान 6 बजे सुबह ही खुल जाती है।
मिठाई की दुकानों पर हलचल तेज
जैसे-जैसे किसी पार्टी या उम्मीदवार की बढ़त की खबरें आती हैं, वैसे-वैसे मिठाई की दुकानों पर भी हलचल तेज हो जाती है। जलेबी की कड़ाही में तैरती चाशनी, गुलाब जामुन की मीठी खुशबू, और रसमलाई की थालियों पर लगी भीड़ बताती है कि बिहार का असली जश्न कहाँ हो रहा है।
कई समर्थक तो अपने उम्मीदवार की बढ़त देखते ही पहले से ऑर्डर कर देते हैं, मिठाई दुकानदारों का कहना है- लीड आते ही फोन बजता है- भैया, मिठाई तैयार रखिए, बस कुछ ही समय में जीत पक्की।
जश्न तो आज पक्का
गांवों में भी यही माहौल है। चौपालों पर चाय-पराठे के बीच चर्चा गर्म, और रसगुल्लों की बाल्टियाँ पहले से तैयार। मानो पूरा बिहार कह रहा हो “जिसकी भी बनें सरकार, जश्न तो आज होना ही है!”
राजनीति का तनाव और खाने का तड़का, बिहार में नतीजों का दिन यही दो चीजें एक साथ हवा में घोल देता है। अब बस इंतजार इस बात का है कि ये सत्तू-पराठे और जलेबी किसकी जीत की मिठास बनेंगे।
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