रिपोर्ट – पंकज वानखेड़े
नई दिल्ली/पटना। भोजपुरी सुपरस्टार और लोकप्रिय नेता पवन सिंह की भारतीय जनता पार्टी में वापसी ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है। माना जा रहा है कि उनकी एंट्री से आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए को जातीय समीकरण के स्तर पर सीधा और बड़ा लाभ मिल सकता है। बीजेपी ने समय रहते एक ऐसे नेता को अपने पाले में वापस खींच लिया है, जिसने पिछले लोकसभा चुनाव में गठबंधन के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी।
2024 का सबक, अब बीजेपी की नई रणनीति
दरअसल, 2024 लोकसभा चुनाव में पवन सिंह ने काराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इस मुकाबले ने एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा को सीधा नुकसान पहुंचाया, जिसके कारण शाहाबाद और मगध क्षेत्र में भाजपा और गठबंधन को भारी क्षति उठानी पड़ी थी।
आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा की 7 सीटें और विधानसभा की तकरीबन 20 सीटें भाजपा के हाथ से निकल गईं या गठबंधन के लिए मुश्किल का सबब बनीं।
यही कारण है कि इस बार भाजपा कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। पवन सिंह को फिर से पार्टी में शामिल कर बीजेपी ने न केवल एक लोकप्रिय चेहरा वापस पाया है, बल्कि राजपूत–कुशवाहा समीकरण को साधने की एक बड़ी कोशिश भी की है, जो बिहार में सत्ता की कुंजी मानी जाती है।
बिहार की राजनीति में सबसे बड़ी हलचल
पवन सिंह की वापसी की पटकथा अचानक दिल्ली में लिखी गई:
- अचानक दिल्ली पहुंचे पवन सिंह: वह गुप्त रूप से दिल्ली पहुंचे, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी।
- उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर हुई अहम बैठक: इस बैठक में भाजपा राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और पार्टी नेता ऋतुराज सिन्हा मौजूद रहे।
- पवन सिंह ने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की, जिसके बाद उनकी वापसी की मुहर लग गई।
“पवन सिंह बीजेपी में हैं, बीजेपी में रहेंगे, और बीजेपी के कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे। वे एनडीए को और मज़बूत बनाएंगे।” – विनोद तावड़े, बीजेपी राष्ट्रीय महासचिव

पवन सिंह की वापसी से NDA को कहाँ फायदा?
- पवन सिंह की लोकप्रियता खासकर भोजपुरी बेल्ट (आरा-बक्सर क्षेत्र) में एनडीए को सीधा लाभ पहुंचाएगी।
- मजबूत जनाधार: सारण, छपरा, आरा, बक्सर और भोजपुर जैसे जिलों में उनका मजबूत जनाधार है।
- युवा शक्ति: युवाओं और भोजपुरी सिनेमा प्रेमियों के बीच उनकी लोकप्रियता, सीटों के समीकरण बदल सकती है।
सीधा लाभ: माना जा रहा है कि उनकी वापसी से एनडीए को 10 से 12 विधानसभा सीटों पर सीधा फायदा हो सकता है, जो करीबी मुकाबलों में निर्णायक साबित हो सकता है।
क्यों अहम है पवन सिंह का भाजपा में आना?
- स्टार पावर और जमीनी कार्यकर्ता: भाजपा को केवल स्टार पावर ही नहीं, बल्कि एक जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने वाला नेता भी मिलेगा।
- क्षेत्रीय पकड़: पवन सिंह का जुड़ाव भोजपुरी भाषा-भाषी इलाकों में एनडीए की पकड़ मजबूत करेगा, खासकर राजपूत वोट बैंक को एकजुट करने में मदद मिलेगी।
- कुशवाहा-राजपूत तालमेल: पवन सिंह के आने से उपेंद्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख) और भाजपा की रणनीति को धार मिलेगी, जिससे राजपूत और कुशवाहा दोनों समुदायों के वोटों को एक साथ लाने की योजना को बल मिलेगा।
- पवन सिंह की यह वापसी अब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक पूँजी मानी जा रही है।

