Asaduddin Owaisi: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा सुर्खियों में बना हुआ है। इसको लेकर विपक्षी दल भी लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने SIR की आलोचना करते हुए निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा है।
चुनाव आयोग पर निशाना
ओवैसी ने दावा किया है कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से नागरिकता के लिए मांगे जा रहे मनमाने दस्तावेजों की वजह से मतदाता जबरन वसूली का शिकार हो सकते हैं। सोशल मीडिया (X)पर पोस्ट करते हुए हैदराबाद सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अचानक शुरू कर दिया और उसके बाद में नियमों को बदल दिया।
The Election Commission abruptly started an “intensive revision” of electoral rolls right before a critical assembly election. It has shifted goalposts: first demanding documentation & then just asking for enumeration forms. Voters will be susceptible to abuse & extortion just… https://t.co/r6HamS4S9A
— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) July 28, 2025
दस्तावेजों को पूरा नहीं करने के कारण होंगे वसूली का शिकार
असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi)ने कहा कि पहले मतदाताओं से दस्तावेज की मांग की गई और उसके बाद गणना प्रपत्र मांगे गए। उन्होंने आगे कहा कि मतदाता सिर्फ इसलिए दुर्व्यवहार और जबरन वसूली के शिकार होंगे क्योंकि वो नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण की निर्वाचन आयोग की मनमानी सूची में शामिल दस्तावेजों को पूरा नहीं करते हैं।
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बता दें कि ओवैसी ने इससे पहले चुनाव आयोग पर अपनी संवैधानिक सीमा से बाहर जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग को नागरिकता तय करने का अधिकार नहीं है। इतना ही नहीं, उन्होंने SIR को ‘बैक डोर से NRC लागू करने की कोशिश’भी बताया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग को यह तय करने का अधिकार किसने दिया कि कौन नागरिक है और कौन नहीं।
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