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‘क्षमा करें, हम मदद नहीं कर सकते’, एलपीजी की कमी की खबरों के बीच विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला

भारत में एलपीजी और ईंधन आपूर्ति को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखी आलोचना की। यह आलोचना उस समय सामने आई जब मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है और कई शहरों में घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबरें आई हैं।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सरकार का कदम

सरकार ने घरेलू खाना पकाने की गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (1955) लागू किया है। इस अधिनियम के तहत रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि वे एलपीजी का उत्पादन अधिकतम करें और प्रमुख हाइड्रोकार्बन धाराओं से गैस को एलपीजी पूल में मोड़ें।

सरकार के आदेश के अनुसार, कुछ क्षेत्रों को प्राथमिकता आधारित गैस आपूर्ति दी जाएगी और संचालन उपलब्धता के अनुसार पिछले छह महीनों की औसत खपत के 100 प्रतिशत तक यह सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा शहरों में घरेलू गैस की बुकिंग 25 दिनों से पहले नहीं की जा सकेगी।

कांग्रेस सांसदों का विरोध

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इस कमी को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच आम नागरिक अपनी दैनिक खाना पकाने की जरूरतों के लिए एलपीजी की कमी का सामना कर रहे हैं। तिवारी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय पूरी तरह जिम्मेदार है, क्योंकि पहले कीमतें बढ़ा दी गईं और अब नई बुकिंग पर प्रतिबंध लगाया गया है।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद की प्रतिक्रिया

शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति में सरकार अप्रस्तुत और दिखावटी नजर आ रही है। उनका कहना था कि शांति काल में तो तैयारियों का दावा किया जाता है, लेकिन युद्धकाल में जनता को वास्तविक मदद नहीं मिल रही है।

समाजवादी पार्टी की चिंता

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात में व्यवधान के कारण सरकार ईंधन की वास्तविक उपलब्धता को लेकर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत में आने वाले कच्चे तेल का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा इस मार्ग से आता है, जो वर्तमान में प्रभावित है।

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने चेतावनी दी कि एलपीजी सिलेंडरों की कमी महंगाई बढ़ा सकती है और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकती है। उनका कहना था कि सरकार का तीन सदस्यीय पैनल इस समस्या को रोकने में सक्षम नहीं है और समस्या बढ़ती जाएगी।

झारखंड से महुआ माजी का बयान

झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने कहा कि रांची में एलपीजी और पेट्रोल के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। उन्होंने बताया कि जनता भविष्य को लेकर चिंतित है और सरकार को अपनी विदेश नीति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद भविष्य अनिश्चित है।

होटल और रेस्तरां उद्योग की समस्याएं

चेन्नई और बेंगलुरु के होटल संघों ने कहा कि व्यावसायिक एलपीजी की आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हो गई है। बेंगलुरु के होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर आपूर्ति जल्द नहीं हुई तो कई प्रतिष्ठान अपना संचालन बंद कर सकते हैं।

चेन्नई होटल्स एसोसिएशन ने कहा कि वाणिज्यिक एलपीजी वितरकों ने स्टॉक की कमी का हवाला देते हुए सिलेंडरों की आपूर्ति बंद कर दी है। इसका असर रेस्तरां संचालन, भोज बुकिंग, आईटी पार्क और कॉलेज छात्रावासों में खाद्य आपूर्ति पर पड़ रहा है। संघ ने प्रधानमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की।

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