Delhi missing persons: देश की राजधानी दिल्ली अब सिर्फ़ ट्रैफिक और मेट्रो की वजह से नहीं, बल्कि लापता लोगों की संख्या के लिए भी चर्चा में है। पिछले 36 दिनों में राजधानी से कुल 2,884 लोग अचानक गायब हुए हैं, जिनमें से केवल 409 लोगों का पता चल पाया है। बाकी 83% लोग अब भी अज्ञात हैं।
हर दिन 82 लोग लापता, 616 बच्चे और 1,372 महिलाएं
आंकड़ों के मुताबिक़ दिल्ली में औसतन हर दिन 82 लोग और हर घंटे लगभग 3 लोग गायब हो रहे हैं। इनमें 616 बच्चे और 1,372 महिलाएं शामिल हैं, जो राजधानी में सुरक्षा और निगरानी की गंभीर कमी की ओर इशारा करते हैं।
ऋतिक झा का मामला
17 वर्षीय ऋतिक झा 17 दिसंबर को अपने घर से गायब हुआ। उसकी मां बेबी झा ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और सभी संबंधित संस्थानों से बेटे को सुरक्षित लौटाने की अपील की। परिवार के अनुसार, पुलिस ने FIR दर्ज की, लेकिन समय पर सीसीटीवी फुटेज नहीं जुटाई और गंभीर प्रयास नहीं किए। परिजनों ने खुद खोजबीन कर ई-रिक्शा और मेट्रो स्टेशन तक की जानकारी जुटाई।
परिजन बने ‘डिटेक्टिव’
परिवार ने खुद CCTV फुटेज निकालकर पुलिस को सौंपा, लेकिन पुलिस के रवैये से संतुष्टि नहीं मिली। अगर शुरू से सही तरीके से जांच होती, तो ऋतिक का कोई सुराग मिल सकता था।
सुराका का मामला
दिल्ली की न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी से 16 वर्षीय सुराका भी पिछले एक महीने से गायब है। पिता ने FIR दर्ज कराई और CCTV फुटेज खुद जुटाई। इसके बावजूद पुलिस अब तक सुराका को ढूंढ नहीं पाई। परिवार ने खोज में मदद देने वाले के लिए 11 हज़ार रुपये का इनाम भी घोषित किया।
महिलाओं की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
1,372 महिलाएं भी गायब हैं, जो दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पिछले 36 दिनों में केवल 17% लोगों को खोजा जा सका है। अधिकांश मामलों में परिवार खुद जांच कर रहे हैं, जबकि पुलिस की भूमिका संदिग्ध बनी हुई है।
दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
राजधानी में लापता होने वाले लोगों की संख्या और उन्हें खोजने की धीमी प्रक्रिया दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाती है। अब सवाल यही है कि क्या दिल्ली सच में सुरक्षित है या यह धीरे-धीरे ‘लापतागंज’ बनती जा रही है।
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