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Republic Day 2026: कई सालों बाद गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगी केरल की झांकी, कोच्चि वॉटर मेट्रो के जरिए दिखेगी आत्मनिर्भरता की थीम; जानिए और क्या है खास

Republic Day 2026: कई वर्षों के अंतराल के बाद केरल एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा है। 26 जनवरी को आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में केरल की झांकी नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर नजर आएगी। इस बार राज्य अपनी झांकी के माध्यम से कोच्चि वॉटर मेट्रो को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा। 2025 सहित पिछले कई संस्करणों में परेड से बाहर रहने के बाद, केरल का उद्देश्य इस बार इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और आत्मनिर्भरता के संगम को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित करना है।

इस गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगी केरल की झांकी

केरल की झांकी का मुख्य आकर्षण कोच्चि वॉटर मेट्रो होगी, जिसे भारत का पहला इलेक्ट्रिक वॉटर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क माना जाता है। यह परियोजना पारंपरिक फेरी सेवाओं से बिल्कुल अलग है। इसमें पूरी तरह इलेक्ट्रिक बोट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं और प्रदूषण को कम करने में मदद करती हैं। इसके अलावा यह नेटवर्क बैरियर-फ्री है, जिससे बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों के लिए यात्रा आसान हो जाती है।

कोच्चि वॉटर मेट्रो को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह मेट्रो रेल और अन्य फीडर सेवाओं से आसानी से जुड़ सके। इससे शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया गया है। जलमार्गों के बेहतर उपयोग से सड़क परिवहन पर दबाव घटा है और यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर का विकल्प मिला है।

भविष्य का ट्रांसपोर्ट मॉडल

कोच्चि वॉटर मेट्रो को भविष्य के लिए तैयार शहरी परिवहन मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इस परियोजना ने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल उन तटीय और जल-आधारित शहरों के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करना चाहते हैं।

गणतंत्र दिवस परेड में केरल की प्रस्तुति को ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर केरल’ की थीम के अनुरूप तैयार किया गया है। इस थीम के तहत राज्य यह संदेश देना चाहता है कि स्वदेशी तकनीक, घरेलू संसाधनों और स्थानीय कौशल के जरिए भी विश्वस्तरीय परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं।

डिजिटल साक्षरता की झलक

कोच्चि वॉटर मेट्रो के साथ-साथ झांकी में केरल की 100 प्रतिशत डिजिटल साक्षरता की उपलब्धि को भी दर्शाया जाएगा। यह उपलब्धि राज्य के समावेशी विकास और सामाजिक प्रगति की पहचान मानी जाती है। डिजिटल शिक्षा, ई-गवर्नेंस और तकनीक के व्यापक उपयोग ने केरल को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया है। झांकी के माध्यम से यह दिखाने की कोशिश होगी कि कैसे तकनीक और जनभागीदारी से विकास को नई दिशा दी जा सकती है।

इस झांकी की परिकल्पना राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा की गई है। इसके डिजाइन और क्रिएटिव निष्पादन का जिम्मा रॉय जोसेफ, जे.एस. चौहान एंड एसोसिएट्स को सौंपा गया है। रक्षा मंत्रालय ने कई चरणों में मूल्यांकन के बाद केरल की झांकी को अंतिम मंजूरी दी। इस प्रक्रिया में मौलिकता, रचनात्मकता, थीम से जुड़ाव और सौंदर्यात्मक प्रभाव जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

पिछले वर्षों का विवाद

गौरतलब है कि केरल 2019, 2020, 2022, 2024 और 2025 की गणतंत्र दिवस परेड में शामिल नहीं हो पाया था। इसको लेकर राज्य में और विपक्षी दलों के बीच असंतोष देखने को मिला था। विपक्ष के शासन वाले कई राज्यों ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार के चयन प्रक्रिया में भेदभाव किया गया है और उन्हें जानबूझकर परेड से बाहर रखा गया।

हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि झांकी चयन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट पर आधारित है। मंत्रालय के अनुसार, कला, संस्कृति, पेंटिंग और वास्तुकला से जुड़े विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति प्रस्तावों का मूल्यांकन करती है और उसी के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।

2023 में आखिरी बार दिखी झांकी

केरल आखिरी बार 2023 की गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुआ था। उस वर्ष राज्य ने अपनी झांकी में नारी शक्ति और महिला सशक्तिकरण की लोक परंपराओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया था। झांकी में कलारीपयट्टू, आदिवासी तालवाद्य और महिलाओं की शिक्षा से जुड़ी उपलब्धियों को दर्शाया गया था।

उस प्रस्तुति में कार्तियानी अम्मा, जिन्होंने 96 वर्ष की उम्र में साक्षरता परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया, और नानचियम्मा, जो राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाली पहली आदिवासी महिला प्लेबैक सिंगर बनीं, जैसे प्रेरणादायक व्यक्तित्वों को शामिल किया गया था। इन उदाहरणों ने केरल की सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक समृद्धि को राष्ट्रीय मंच पर उजागर किया।

कर्तव्य पथ पर नई पहचान

इस बार कोच्चि वॉटर मेट्रो की झांकी के साथ केरल एक नए संदेश के साथ कर्तव्य पथ पर लौट रहा है। राज्य यह दिखाना चाहता है कि विकास केवल बड़े शहरों या भारी उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संसाधनों के सही उपयोग से भी टिकाऊ विकास संभव है।

केरल की यह वापसी न सिर्फ राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए भी एक सकारात्मक और प्रेरक संकेत मानी जा रही है। गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर इस तरह की झांकियां भारत की सांस्कृतिक विविधता, तकनीकी प्रगति और दूरदर्शी सोच को प्रभावशाली तरीके से सामने लाती हैं। इनोवेशन, सस्टेनेबिलिटी और आत्मनिर्भरता के मजबूत संदेश के साथ केरल एक बार फिर भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में अपनी अग्रणी और प्रेरणादायक पहचान स्थापित करता नजर आ रहा है।

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