ट्रेन की लेट-लतीफी के चलते उपभोक्ता विभाग ने रेलवे पर 9.10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही बस्ती जिले की NEET छात्रा समृद्धि को मामले में 8 साल बाद इंसाफ मिलता नज़र आ रहा है। दरअसल, 2018 में छात्रा समृद्धि घर से मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम (NEET) देने घर से निकली थी। उसने लखनऊ जाने के लिए बस्ती स्टेशन से इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट खरीदा। ट्रेन को सुबह 11 बजे लखनऊ पहुंचना था, लेकिन वह ढाई घंटे देरी से पहुंची। इसकी वजह से छात्रा एग्जाम सेंटर पर देरी से पहुंची और उसका एग्जाम छूट गया।
रेलवे ने मानी है अपनी गलती
ट्रेन की लेट-लतीफी की वजह से छात्रा ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया। छात्रा ने वकील प्रभाकर मिश्रा के जरिए 20 लाख रुपये के मुआवजे का दावा दायर किया था। रेल मंत्रालय, महाप्रबंधक और स्टेशन अधीक्षक को नोटिस जारी किया गया है। रेलवे में अपनी गलती मानते हुए स्वीकार किया कि देरी हुई है, लेकिन उसकी वजह नहीं बता सका। आयोग ने रेलवे को 45 दिन के अंदर मुआवजे की राशि 9.10 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
मामले में उपभोक्ता आयोग का एक्शन
करीब 8 साल चले केस के बाद, उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष, जज अरमजीत वर्मा और मेंबर अजय प्रकाश सिंह ने रेलवे को कसूरवार ठहराया। आयोग ने रेलवे पर 9,10,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो छात्रा को दिया जाएगा। कोर्ट यह भी कहा कि अगर रेलवे मुआवजा देने में देरी करता है तो उसे 12% ब्याज भी देना होगा।
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