Nepal Election 2026 results: नेपाल में 2026 के संसदीय चुनावों के शुरुआती नतीजे देश की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं। पिछले वर्ष हुए बड़े युवा आंदोलन के बाद यह पहला चुनाव है, जिसे कई लोग राजनीतिक बदलाव की दिशा में अहम मान रहे हैं। शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) मजबूत प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है।
यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब 2025 में युवाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिनके बाद तत्कालीन सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इस आंदोलन ने देश की पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी और युवाओं में बदलाव की उम्मीद जगाई।
बलेंद्र शाह की पार्टी को मिल रहा बड़ा समर्थन
प्रारंभिक परिणामों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत 25 सीटें जीत ली हैं और कई अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है। पार्टी लगभग 93 सीटों पर आगे चल रही बताई जा रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नई राजनीतिक ताकत के रूप में आरएसपी तेजी से उभर रही है।
पूर्व रैपर और हाल ही में काठमांडू के मेयर रहे बलेंद्र शाह ने अपनी राजनीतिक पहचान पारंपरिक नेताओं की आलोचना और व्यवस्था में बदलाव के वादों के आधार पर बनाई है। यही कारण है कि शहरी युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
झापा-5 सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री को चुनौती
चुनाव के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक झापा-5 सीट भी है, जहां बलेंद्र शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को कड़ी चुनौती दी है। यह क्षेत्र लंबे समय से ओली का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। प्रारंभिक मतगणना में शाह को 15,000 से अधिक वोट मिल चुके हैं, जबकि ओली को करीब 3,300 वोट प्राप्त हुए हैं। यदि यही रुझान जारी रहता है, तो इसे नेपाल की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जाएगा।
नेपाल की चुनावी प्रणाली कैसे काम करती है
नेपाल की संघीय संसद के निचले सदन में कुल 275 सीटें हैं। इनमें से 165 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं, जिन्हें प्रथम-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली कहा जाता है। इसके अलावा 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर राजनीतिक दलों के कुल वोट प्रतिशत के अनुसार बांटी जाती हैं। मतदाता मतदान के दिन दो मतपत्रों का उपयोग करते हैं। एक अपने क्षेत्र के उम्मीदवार के लिए और दूसरा किसी राजनीतिक दल के लिए। यही मिश्रित प्रणाली नेपाल की चुनाव प्रक्रिया को अलग बनाती है।
अन्य दलों की स्थिति
शुरुआती रुझानों में पारंपरिक दलों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दे रहा है। नेपाली कांग्रेस ने अब तक तीन सीटें जीती हैं, जबकि सीपीएन कुछ सीटों पर आगे चल रही है। इसके अलावा अन्य छोटे दल भी कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए हैं।
युवाओं की भूमिका बनी निर्णायक
इन चुनावों में युवाओं की भागीदारी खास तौर पर चर्चा में रही है। अनुमान के अनुसार करीब 60 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया, जिसमें बड़ी संख्या में युवा मतदाता शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया, डिजिटल प्रचार और सत्ता विरोधी संदेशों ने युवाओं को बड़ी संख्या में मतदान के लिए प्रेरित किया। इसी वजह से बलेंद्र शाह और उनकी पार्टी को युवा वर्ग का मजबूत समर्थन मिला।
2025 के विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि
नेपाल में यह चुनाव पिछले साल हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद हो रहा है। उस समय भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सोशल मीडिया प्रतिबंधों के विरोध में हजारों युवा सड़कों पर उतर आए थे। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हो गए थे। इन घटनाओं के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा और अंतरिम सरकार का गठन किया गया। उसी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद यह चुनाव कराया जा रहा है।
बदलाव की उम्मीद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे नेपाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर सकते हैं। यदि नए दलों का प्रदर्शन मजबूत रहता है, तो पारंपरिक राजनीतिक दलों के वर्चस्व को चुनौती मिल सकती है। फिलहाल मतगणना जारी है, लेकिन शुरुआती रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि नेपाल की राजनीति में युवाओं की आवाज पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली बनती जा रही है।

