Jyeshtha Adhik Purnima 2026: आज ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से किए गए स्नान, व्रत, दान और पूजा-पाठ से जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए यह तिथि पति की लंबी आयु और दांपत्य सुख की कामना हेतु बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अधिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह में अधिक मास होने के कारण दो पूर्णिमा तिथियां पड़ रही हैं। अधिक मास में आने वाली पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा में स्नान करने से विशेष फल प्राप्त होता है। यदि तीर्थ स्नान संभव न हो तो घर पर ही पवित्र जल से स्नान और संध्या वंदन करना भी शुभ माना जाता है।
पूजा, सेवा और दान का मिलता है शुभ फल
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना, दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सेवा को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य और सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर क्या करें दान?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन जल से भरपूर फलों का दान करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु तरबूज, खरबूजा, खीरा और गन्ने के रस जैसी वस्तुओं का दान कर सकते हैं। इसके अलावा गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना तथा मालपुए का दान भी पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे परिवार में खुशहाली और समृद्धि बनी रहती है।
स्नान और दान के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:34 बजे से 5:17 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 बजे से 1:03 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:48 बजे से 3:41 बजे तक
वास्तु दोष से मुक्ति के लिए उपाय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि किसी घर में वास्तु संबंधी परेशानियां बनी हुई हों तो ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वट वृक्ष का पौधा लगाकर उसका पूजन करना लाभकारी माना जाता है। परंपरा के अनुसार पौधे की नियमित सेवा करने के बाद उसे किसी मंदिर या जलाशय के समीप सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया जा सकता है। ऐसा करने से घर में मौजूद नकारात्मक प्रभाव और वास्तु दोषों में कमी आने की मान्यता है।
श्रद्धा और भक्ति का दिन
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा को भक्ति, दान और आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और जरूरतमंदों की सहायता करने से व्यक्ति को धार्मिक पुण्य के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि प्राप्त होने की मान्यता है।
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