Union Budget 2026: हर साल बजट दिवस देशभर में खास उत्सुकता लेकर आता है। संसद भवन से लेकर आम लोगों के घर तक, हर नजर वित्त मंत्री के हाथ में पकड़ी लाल फाइल पर टिकी होती है, जिसमें देश की आर्थिक दिशा और नीतियां तय होती हैं। बजट की यही लाल फाइल लोगों के बीच हमेशा चर्चा का विषय रहती है।
ब्रिटिश शासन से जुड़ी परंपरा
लाल रंग और बजट की जोड़ी का इतिहास ब्रिटिश काल तक जाता है। ब्रिटेन में सरकारी और वित्तीय दस्तावेजों को लाल कवर में रखा जाता था, जिसे शक्ति, गंभीरता और आधिकारिक फैसलों का प्रतीक माना जाता था।
भारत में पहला बजट 1860 में पेश किया गया, तब इसी लाल फाइल की परंपरा को अपनाया गया। धीरे-धीरे यह लाल फाइल देश की आर्थिक नीतियों और सरकारी निर्णयों की पहचान बन गई। स्वतंत्रता के बाद भी यह परंपरा कई दशकों तक कायम रही।
शक्ति और जिम्मेदारी का प्रतीक
लाल रंग को हमेशा से शक्ति, जिम्मेदारी और गंभीरता से जोड़ा जाता रहा है। बजट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज, जो देश की आय, व्यय, कर नीतियों और विकास योजनाओं को तय करता है, उसके लिए लाल रंग उपयुक्त माना गया।
सामान्य जनता के लिए लाल फाइल सिर्फ कागज का आवरण नहीं है। यह सरकार की आर्थिक जिम्मेदारी और फैसलों के महत्व का प्रतीक बन गई है। इसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश की वित्तीय नीतियों और योजनाओं में कितनी गंभीरता और सोच झलकती है।
2019 और 2021 में हुई बदलाव की शुरुआत
समय के साथ बजट प्रस्तुति की शैली में बदलाव आया। वर्ष 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पारंपरिक ब्रीफकेस को छोड़कर लाल रंग की कपड़े की फाइल अपनाई, जिसे पारंपरिक ‘बही-खाता’ के रूप में पेश किया गया। इसे औपनिवेशिक परंपराओं से दूरी बनाने के संकेत के रूप में देखा गया।
फिर वर्ष 2021 में बजट पूरी तरह डिजिटल रूप में प्रस्तुत किया गया। वित्त मंत्री ने ‘मेड इन इंडिया’ टैबलेट के जरिए बजट पेश किया, जिसे लाल कवर में रखा गया। यह कदम आधुनिक तकनीक और परंपरा के संतुलन को दर्शाता है।
लाल फाइल का महत्व
आज भी लाल फाइल बजट की पहचान और प्रतीक बनी हुई है। यह न केवल सरकार की गंभीरता और जिम्मेदारी दिखाती है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में बढ़ रही है। हर साल वित्त मंत्री के हाथ में यह फाइल आते ही मीडिया, निवेशक और आम जनता की निगाहें उस पर टिक जाती हैं।
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