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UGC नियमों को लागू करने की मांग तेज, डीयू में छात्रों ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन

DU Students Protest UGC Rules: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के नॉर्थ कैंपस में मंगलवार, 3 फरवरी को बड़ी संख्या में छात्रों ने एकजुट होकर मार्च निकाला और यूजीसी समानता नियम 2026 को तुरंत लागू करने की मांग उठाई। ‘इक्विटी मार्च’ के नाम से हुए इस प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) सहित कई छात्र संगठनों ने हिस्सा लिया।

हाथों में तख्तियां लिए और नारे लगाते छात्रों ने कहा कि इन नियमों पर हाल ही में लगी न्यायिक रोक से उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ लंबे समय से चल रहा संघर्ष एक बार फिर पीछे चला गया है।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना था कि समानता नियम केवल औपचारिक दिशा-निर्देश नहीं हैं, बल्कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के अधिकारों की रक्षा और जवाबदेही तय करने का एक मजबूत माध्यम हैं। उनका तर्क था कि इन नियमों को ‘रोहित एक्ट’ की भावना के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए।

यहां ‘रोहित एक्ट’ से तात्पर्य प्रस्तावित रोहित वेमुला अधिनियम से है, जिसका उद्देश्य देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में छात्रों के साथ होने वाले जाति और पहचान आधारित भेदभाव को रोकने के लिए एक केंद्रीय कानून बनाना है। यह प्रस्ताव हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला के नाम पर रखा गया है, जिनकी 2016 में कथित रूप से भेदभाव के चलते मृत्यु हो गई थी।

‘फिर असुरक्षित महसूस करेंगे हाशिए के छात्र’

छात्रों ने कहा कि समानता नियम देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में वर्षों से चले आंदोलनों और संघर्षों का नतीजा हैं। उनका आरोप था कि इन नियमों पर रोक लगने से एक बार फिर हाशिए पर रहने वाले वर्गों के छात्र खुद को असुरक्षित महसूस करेंगे।

सभा को संबोधित करते हुए जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष नितीश ने कहा कि लगातार संघर्ष और बलिदान के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को जवाबदेही तय करने वाले नियम लाने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने कहा, “इन नियमों पर लगी रोक यह दिखाती है कि हमारे शैक्षणिक संस्थानों के ऊपरी स्तरों पर आज भी जातिवादी सोच गहराई से मौजूद है। जब तक वास्तविक समानता सुनिश्चित नहीं होती, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।”

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