Maharishi Sansthan Scam News: उत्तर प्रदेश के नोएडा में महर्षि संस्थान से जुड़े कथित लैंड स्कैम को लेकर न्यूज इंडिया 24X7 की बड़ी पड़ताल जारी है। चैनल की सुपर-एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नोएडा अथॉरिटी की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर उसकी खुलेआम बिक्री की जा रही है। जांच के दौरान सामने आया कि संस्थान से जुड़े लोगों ने दस्तावेजी प्रक्रिया का सहारा लेकर जमीन के ट्रांसफर और पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए फ्लैटों का निर्माण कराया और करोड़ों रुपये की कमाई की। रिपोर्ट के मुताबिक 26 जून 2015 को एक बोर्ड रेजोल्यूशन के माध्यम से राहुल भारद्वाज को अधिकार दिए गए, जिसके बाद 11 अगस्त 2015 को आगरा में अनुज गौड़ को पावर ऑफ अटॉर्नी सौंप दी गई। आरोप है कि इसके बाद संबंधित जमीन पर अवैध तरीके से निर्माण कर फ्लैट बेचे गए। खसरा नंबर 226, 220, 231, 210 और 247 को सरकारी जमीन बताया जा रहा है। प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देशों के बावजूद इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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ADM ने आदेश जारी कर जमीन की रजिस्ट्री पर लगाई थी रोक
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संबंधित जमीन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पहले ही आपत्ति दर्ज की जा चुकी थी। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 और 2019 में एडीएम के आदेश में खसरा नंबर-226 को सरकारी जमीन बताया गया था और इस पर रजिस्ट्री पर रोक भी लगा दी गई थी। इसके बावजूद आरोप है कि जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त जारी रही और नियमों को दरकिनार कर प्लॉटों की बिक्री की गई। जांच में यह भी सामने आया कि जमीन का सर्किल रेट करीब 11 करोड़ रुपये था, लेकिन दस्तावेजों में केवल 25 लाख रुपये का लेन-देन दिखाया गया, जबकि स्टांप ड्यूटी 56 लाख रुपये दर्शाई गई। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 तक इस जमीन की बाजार कीमत 120 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई। आरोप है कि वास्तविक लेन-देन करोड़ों रुपये नकद में हुआ, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा और पूरे मामले में बड़े वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट में जमीन खरीद फरोख्त में खड़े होते हैं ये सवाल
जमीन से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जब संबंधित जमीन पहले ही अनुज गौड़ के नाम दर्ज थी, तो वर्ष 2022 में महर्षि संस्थान द्वारा उसी जमीन की दोबारा बिक्री कैसे की गई। इसके अलावा दावा है कि अनुज गौड़ द्वारा जमीन का हस्तांतरण किए जाने के बाद भी वर्ष 2024 में महर्षि संस्थान ने उसी भूखंड की पुनः रजिस्ट्री कर दी। मामले में यह भी आरोप सामने आया है कि मेसर्स ट्रू मेन रियल्टी के पार्टनर प्रदीप कुमार गुप्ता को भी जमीन बेची गई, जिससे एक ही संपत्ति के कई बार सौदे होने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उपलब्ध रकबे से अधिक जमीन की बिक्री दर्शाई गई, जिससे फर्जी रजिस्ट्री और दस्तावेजी हेरफेर की संभावना मजबूत होती है। इन तथ्यों के आधार पर आरोप लगाया जा रहा है कि राज्य सरकार और स्थानीय निकाय (एलएमसी) की जमीन पर कब्जा कर अवैध तरीके से प्लॉटिंग और बिक्री की गई, जिसने पूरे प्रकरण को बड़े जमीन घोटाले के शक के दायरे में ला दिया है।
बेची गई जमीन का मार्केट रेट 100 करोड से ज्यादा है
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महर्षि संस्थान द्वारा कब्जाई गई जमीन और बनाए गए आवास वाली जमीनों की कीमत 100 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की है। इसके बावजूद लैंफ माफिया ने साठगांठ से इन जमीनों की रजिस्ट्र शुल्क सिर्फ 25 लाख रुपए चुकाए। रजिस्ट्री पेपर खुद जाहिर करते हैं कि इस जमीन की खरीद फरोख्त में सरकार को बड़ा राजस्व नुकसान पहुंचाया गया है।
इंडिया न्यूज़ के फोन कॉल का नहीं दे रहा सरकारी अमला जवाब
महर्षि संस्थान पर सरकारी जमीनों पर कथित कब्जे के आरोपों को लेकर इंडिया न्यूज 24X7 ने नोएडा प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन किसी भी अधिकारी की ओर से प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। रिपोर्ट के अनुसार नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों और जिला प्रशासन को किए गए कई फोन कॉल का जवाब नहीं दिया गया। रिपोर्ट में दावा है कि नोएडा अथॉरिटी के CEO और ACO से भी संपर्क साधने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने भी कॉल रिसीव नहीं किया। वहीं गौतमबुद्धनगर के DM कार्यालय से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली। ADM बच्चू सिंह से संपर्क की कोशिश भी बेनतीजा रही और मेघा रूपम से संपर्क करने पर भी फोन नहीं उठाया गया। ऐसे में जमीन से जुड़े गंभीर आरोपों के बीच प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। चैनल का कहना है कि मामले में स्पष्ट जवाब न मिलना और लगातार संपर्क के बावजूद प्रतिक्रिया न आना यह संकेत देता है कि जमीन विवाद पर सरकारी विभागों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्थिति सामने नहीं रखी गई है, जिससे पूरे प्रकरण को लेकर संशय और बढ़ गया है।
दिल्ली HC से महर्षि संस्थान को लग चुकी है फटकार
महर्षि संस्थान की अवैध जमीनों से जुड़ी खबरों को न्यूज़ इंडिया ने दस्तावेजों के साथ प्रमुखता से दिखाया। इस पर महर्षि संस्थान ने खबरों के कवरेज पर रोक लगाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रूख किया। जहां सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने महर्षि संस्थान की अपील को खारिज करते हुए फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि यह न्यूज चैनल या समाचार संस्थान का अधिकार है और इस मामले में न्यूज़ इंडिया 24X7 को उसे उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता है।
क्या मामले में ईडी की सीधे हो सकती है एंट्री
ग्राउंड रिपोर्ट में नोएडा क्षेत्र की कई इमारतों और कॉलोनियों को अवैध निर्माण बताया गया, जबकि प्रशासन पर कार्रवाई में ढिलाई के आरोप लगे। मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि ईडी सीधे जांच शुरू नहीं कर सकती, पहले स्थानीय पुलिस या संबंधित एजेंसी को प्राथमिकी दर्ज करनी होगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आम खरीदारों की जीवनभर की कमाई दांव पर लगी है और मामले में लैंड माफिया की भूमिका की जांच जरूरी है।
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