होम = Cover Story Featured = स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर महंत राजूदास ने महंत रविंद्र पुरी से कर डाली यह मांग, कहा- संतों की एक बड़ी सभा बुलाए

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर महंत राजूदास ने महंत रविंद्र पुरी से कर डाली यह मांग, कहा- संतों की एक बड़ी सभा बुलाए

Swami Avimukteshwaranand News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज माघ मेले में पालकी विवाद के बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में और उनके खिलाफ राजनेताओं से लेकर संतों व कथावाचकों के बयान सामने आ रहे हैं। इस बीच शुक्रवार को हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी जी महाराज से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कार्रवाई कर शंकराचार्य पद से हटाए जाने की मांग की।

क्या कहा महंत राजू दास ने

न्यूज़ इंडिया 24×7 के एक टीवी डिबेट शो में हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य पद के योग्य नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी जी महाराज से मेरी प्रार्थना है कि विचार कर संतों की सभा बैठक बुलाए और उनको (अविमुक्तेश्वरानंद) पद से हटाया जाए। “

रविंद्र जी महाराज का क्या कहना

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी जी महाराज ने महंत राजू दास के बयान से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि जब भी सनातन धर्म की बात होती है तो तथाकथित शंकराचार्य (अविमुक्तेश्वरानंद) उसका विरोध करते हैं। उन्होंने कहा अविमुक्तेश्वरानंद काशी, मथुरा, राम मंदिर, यूसीसी और आर्टिकल 370 समेत तमाम मुद्दों का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा, “हमने कई बार अविमुक्तेश्वरानंद जी से कहा कि वे इस मुद्दे पर संतों से बात करें, हम से बात करें, हम बीच का रास्ता निकालेंगे, लेकिन उन्होंने संतों, मठाधीशों व आचार्यों से बात नहीं की। अविमुक्तेश्वरानंद ने कांग्रेस और सपा से बात की।”

स्वामी अविमुक्श्तेवरांद से जुड़ा विवाद क्या है?

18 जनवरी को मौनी अमावस्या स्नान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को स्नान नहीं करने देने पर बवाल मचा हुआ है। आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों को पुलिस ने जमकर पीटा। वहीं, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए थे। इसके बाद प्रयागराज प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा। यहां तक कि प्रशासन ने नोटिस में अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद से विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।

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