India Iran tanker passage: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के बीच, भारत को होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल परिवहन के लिए बड़ी राहत मिली है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अघारची के बीच हुई बातचीत के बाद ईरान ने स्पष्ट किया कि भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकरों को सुरक्षित रूप से इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
विदेश मंत्रियों की वार्ता और बातचीत का क्रम
जयशंकर ने 10 मार्च को अरघची से टेलीफोन पर वार्ता की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने संघर्षग्रस्त क्षेत्र में हालिया घटनाओं पर विस्तार से चर्चा की और संपर्क में रहने की सहमति जताई। यह लगभग दो सप्ताह के भीतर दोनों नेताओं के बीच तीसरा संवाद था। इससे पहले 28 फरवरी और 5 मार्च को भी वार्ता हुई थी। यह कूटनीतिक प्रयास भारत की ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।
शेनलॉन्ग टैंकर की सुरक्षित पारगमन
इस वार्ता से पहले ही बुधवार, 11 मार्च को लाइबेरियाई ध्वज वाला टैंकर शेनलोंग स्वेजमैक्स ने खतरनाक होर्मुज जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक पार किया और मुंबई बंदरगाह पर लंगर डाला। यह जहाज शत्रुता शुरू होने के बाद भारत के लिए कच्चे तेल की पहली खेप लेकर आया था।
टैंकर 1 मार्च को रस तनुरा बंदरगाह से 135,335 मीट्रिक टन क्रूड तेल लेकर रवाना हुआ और 8 मार्च को जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर गया। इसके बाद कुछ समय के लिए यह ट्रैकिंग रडार से गायब हो गया और 9 मार्च को पुनः दिखाई दिया। इस रणनीति का उद्देश्य उन जलक्षेत्रों से बचना था, जहां ईरान ने तेल परिवहन को बाधित किया था और चीन को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को मार्ग अवरुद्ध किया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित 55 किलोमीटर चौड़ा संकरा मार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां से गुजरने वाला तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति होता है।
सामान्यतः प्रतिदिन लगभग 13 मिलियन बैरल तेल इस मार्ग से होकर गुजरता है, जो वैश्विक तेल परिवहन का लगभग 31 प्रतिशत है। जलमार्ग में किसी भी प्रकार की दीर्घकालिक रुकावट तेल की कीमतों पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। फरवरी 2025 में जलडमरूमध्य के कुछ हिस्सों के थोड़े समय के लिए बंद होने से तेल की कीमतों में छह प्रतिशत तक की वृद्धि हुई थी।
वैश्विक तेल बाजार और भारत की राहत
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों के बाद ईरान ने इस मार्ग पर कई प्रतिबंध लगाए और इसे रणनीतिक रूप से नियंत्रित करने का प्रयास किया। भारत के लिए भारतीय तेल टैंकरों को सुरक्षित पारगमन की अनुमति मिलने से कच्चे तेल की आपूर्ति में राहत मिली है।

