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सीएम शुभेंदु ने चिकन नेक की 121 हेक्टेयर जमीन BSF को सौंपी, बांग्लादेश सीमा पर जल्द होगी फेंसिंग

by | May 28, 2026 | Cover Story Big, Trending

पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले “चिकन नेक” इलाके सहित सीमावर्ती क्षेत्रों की जमीन BSF को सौंपने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सरकार का दावा है कि इससे सीमा सुरक्षा मजबूत होगी और घुसपैठ तथा तस्करी जैसी गतिविधियों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। हाल ही में राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि सीमा क्षेत्रों में BSF चौकियों और बार्ब्ड वायर फेंसिंग के लिए बड़ी मात्रा में जमीन हस्तांतरित की गई है। इस फैसले के बाद सीमाई सुरक्षा, राष्ट्रीय रणनीति और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

क्या है ‘चिकन नेक’ और क्यों है इतना महत्वपूर्ण

भारत का “चिकन नेक” या सिलीगुड़ी कॉरिडोर देश के सबसे संवेदनशील रणनीतिक इलाकों में गिना जाता है। यह पश्चिम बंगाल का एक बेहद संकरा भूभाग है जो: पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के बेहद करीब स्थित है, सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत अहम माना जाता है, कई जगहों पर यह कॉरिडोर बहुत संकरा हो जाता है, इसलिए इसे “चिकन नेक” कहा जाता है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अगर इस क्षेत्र की सुरक्षा कमजोर हो तो पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।

BSF को जमीन सौंपने का क्या मतलब है

सरकार ने सीमा पर नई चौकियां बनाने, कंटीले तार लगाने, निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, के लिए जमीन उपलब्ध कराई है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह प्रक्रिया भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंबे समय से लंबित फेंसिंग कार्य को तेज करने के लिए की जा रही है।

बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग क्यों जरूरी मानी जा रही है

भारत-बांग्लादेश सीमा दुनिया की सबसे व्यस्त और संवेदनशील सीमाओं में गिनी जाती है। सीमाई इलाकों में कई चुनौतियां सामने आती रही हैं: अवैध घुसपैठ, पशु तस्करी, नकली मुद्रा नेटवर्क, हथियार और नशे की तस्करी इन्हीं कारणों से लंबे समय से सीमा पर मजबूत फेंसिंग की मांग उठती रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा का बड़ा हिस्सा पहले ही फेंसिंग के दायरे में आ चुका है, लेकिन अभी भी कई किलोमीटर क्षेत्र ऐसा है जहां कंटीले तार नहीं लगे हैं।

राजनीतिक स्तर पर क्यों हो रही चर्चा

सीमा सुरक्षा हमेशा से बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही है। इस फैसले को लेकर भी अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कुछ लोग इसे: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं।

वहीं विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं कि: जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही स्थानीय लोगों की सहमति कितनी ली गई।

आने वाले समय में क्या हो सकता है

आने वाले महीनों में:
नई BSF चौकियों का निर्माण
अतिरिक्त फेंसिंग
हाई-टेक निगरानी सिस्टम
सरकार सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

चिकन नेक और भारत-बांग्लादेश सीमा से जुड़े इलाकों में BSF को जमीन सौंपने का फैसला केवल प्रशासनिक कदम नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है। फेंसिंग और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होने से सीमाई इलाकों में निगरानी और नियंत्रण बेहतर हो सकता है। हालांकि इसके साथ स्थानीय लोगों की समस्याओं और जमीन से जुड़े मुद्दों को संतुलित तरीके से संभालना भी जरूरी होगा। आने वाले समय में यह परियोजना पूर्वी भारत की सुरक्षा रणनीति में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

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