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अफगानिस्तान SCO में लौटने को तैयार, पाकिस्तान को चुनौती; भारत को मिलेगा फायदा

by | Feb 2, 2026 | Breaking, Cover Story Big

Afghanistan In SCO: भारत और अफगानिस्तान के करीबी रिश्तों के बीच पाकिस्तान के लिए क्षेत्रीय राजनीति में चुनौती बढ़ती दिख रही है। अफगानिस्तान के शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भागीदारी को लेकर नई खबरें सामने आई हैं। रूस में अफगानिस्तान के राजदूत गुल हसन ने बताया कि उनकी सरकार SCO के साथ सहयोग फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिलहाल अफगानिस्तान संगठन में सिर्फ पर्यवेक्षक के रूप में शामिल है, लेकिन अब वह बैठकों में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।

अफगान प्रतिनिधि बैठकों में होंगे शामिल

रूसी समाचार एजेंसी TASS को दिए इंटरव्यू में गुल हसन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाली SCO बैठकों में अफगान प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। उन्होंने बताया कि रूस और चीन के प्रयासों के बाद अधिकांश सदस्य देशों ने यह मान लिया है कि अफगानिस्तान की भागीदारी को फिर से शुरू करना आवश्यक और व्यावहारिक है।

पाकिस्तान के लिए नई चुनौती

अफगानिस्तान की सक्रियता पाकिस्तान के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है। अगर तालिबानी सरकार SCO मंच पर प्रभावशाली भूमिका निभाती है, तो पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक ही मंच पर समान स्तर पर बैठेंगे, जो इस्लामाबाद के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौती बन सकता है।

अफगानिस्तान SCO में शामिल होने से पाकिस्तान का प्रभाव घट सकता है

गुल हसन के अनुसार, अफगानिस्तान SCO के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद रोधी प्रयास, ड्रग तस्करी रोकथाम और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर काम करना चाहता है। उनका मानना है कि अफगानिस्तान को अलग-थलग रखने के बजाय क्षेत्रीय ढांचे का हिस्सा बनाना पूरे इलाके के हित में है। अगर अफगानिस्तान सक्रिय रूप से SCO में शामिल होता है, तो पाकिस्तान का प्रभाव कमजोर पड़ सकता है। इससे भारत को भी फायदा होगा, क्योंकि वह पहले से ही SCO का सदस्य है और अफगानिस्तान के साथ पुराने और मजबूत रिश्ते रखता है।

चीन का समर्थन और आर्थिक सहयोग

इसके अलावा, चीन भी अफगानिस्तान के साथ प्रत्यक्ष आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इससे पाकिस्तान पर उसकी निर्भरता कम हो सकती है। अगर SCO अफगानिस्तान को लेकर साझा नीति बनाता है, तो पाकिस्तान को उसी के अनुसार चलना पड़ेगा। SCO में चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान और मध्य एशिया के कई देश शामिल हैं। ऐसे में अफगानिस्तान की सक्रिय वापसी उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान और क्षेत्रीय शक्ति दोनों दिला सकती है।

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