होम = देश = अप्रैल के बाद क्या बदल जाएगी बैंकिंग की तस्वीर; ये बड़े बैंक होंगे मर्ज! जानें क्या हो सकता है ?

अप्रैल के बाद क्या बदल जाएगी बैंकिंग की तस्वीर; ये बड़े बैंक होंगे मर्ज! जानें क्या हो सकता है ?

Bank Merger : केंद्र सरकार फिर से बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। खबरों के मुताबिक, सरकार छह बड़े सरकारी बैंकों को एक-दूसरे के साथ या किसी बड़े बैंक में मिलाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद भारत में ऐसे बड़े बैंक तैयार करना है, जो दुनिया के टॉप 100 बैंकों में जगह बना सकें। SBI जैसे बड़े सरकारी बैंक भी चाहते हैं कि बड़े-बड़े बैंक तैयार हों, जिससे उनकी मार्केट वैल्यू बढ़ सके।

बैंक मर्जर से क्या हासिल होगा ?

बैंक मर्जर से कई फायदे होने की उम्मीद है:

  • बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी
  • NPA यानी बकाया कर्ज घटेगा
  • डिजिटल सुविधाओं में सुधार होगा
  • भारतीय बैंकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी

जिन बैंकों पर चर्चा हो रही है

अगले मर्जर में जिन बैंकों पर विचार किया जा रहा है :

  • बैंक ऑफ इंडिया
  • इंडियन ओवरसीज़ बैंक
  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
  • बैंक ऑफ महाराष्ट्र
  • यूको बैंक
  • पंजाब एंड सिंध बैंक

इनमें से कुछ बैंक एक-दूसरे के साथ या किसी बड़े बैंक में मिल सकते हैं।

अतीत के मर्जर से मिली सीख

1993 से अब तक कई बड़े मर्जर हो चुके हैं। इससे बैंकों की पूंजी क्षमता बढ़ी, तकनीक में सुधार हुआ, जोखिम कम हुआ और शाखाओं का खर्च घटा।

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कुछ प्रमुख मर्जर

  • 2017: SBI ने अपने छह सहयोगी बैंकों को मिलाया और देश का सबसे बड़ा बैंक बना।
  • 2019: बैंक ऑफ बड़ौदा ने विजया बैंक और देना बैंक को मिलाया, तीसरा सबसे बड़ा बैंक बना।
  • 2020: PNB ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को मिलाया। केनरा बैंक ने सिंडिकेट बैंक को जोड़ा। यूनियन बैंक ने आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को मिलाया। इंडियन बैंक ने इलाहाबाद बैंक को मिलाया।

अगला मर्जर कब हो सकता है ?

हालांकि वित्त मंत्रालय ने अभी कोई आधिकारिक नाम नहीं बताया है, लेकिन उम्मीद है कि अप्रैल 2026 तक कोई बड़ी घोषणा हो सकती है। इस बार मर्जर दो–तीन चरणों में किए जा सकते हैं, ताकि प्रक्रिया आसान हो और पूंजी प्रबंधन बेहतर हो।

लंबी अवधि का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी बैंकों की संख्या 12 से घटाकर 6-7 मजबूत और प्रतिस्पर्धी बैंक बनाई जाए। इससे :

  • बैंकों की बैलेंस शीट मजबूत होगी
  • लोन देने की क्षमता बढ़ेगी
  • कामकाज बेहतर होगा
  • भारत के तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को सपोर्ट करने के लिए बड़े बैंक तैयार होंगे

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