Indian Stock Markets: पश्चिम एशिया में बढ़ते अमेरिका-ईरान तनाव का असर अब भारत में भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को इसका सीधा प्रभाव मुंबई के शेयर बाजार और नई दिल्ली की संसद दोनों जगह देखने को मिला। एक तरफ शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज हुई, वहीं दूसरी ओर संसद में इस मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने संभावित वैश्विक संकट को लेकर पर्याप्त तैयारी नहीं की। साथ ही हाल ही में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को भी भारत के हितों के खिलाफ बताया गया।
शेयर बाजार में बड़ी गिरावट
इस बीच शेयर बाजार में बड़ी गिरावट ने निवेशकों को झटका दिया। सोमवार को सेंसेक्स करीब 3 प्रतिशत यानी लगभग 2500 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी-50 में भी इसी तरह की गिरावट देखने को मिली। फरवरी के अंत से शुरू हुए इस संकट के बाद बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹25 लाख करोड़ तक घट गया है, जिससे निवेशकों की संपत्ति में भारी नुकसान हुआ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालकर सोना और अमेरिकी डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी दौरान पश्चिम एशिया में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।
इस संकट का भारत पर असर
भारत के लिए यह संकट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय काम करते हैं और यह क्षेत्र भारत के लिए एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसके अलावा भारत अपनी 85 से 90 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है। युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड करीब $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई बढ़ सकती है और भारत की आर्थिक वृद्धि दर भी प्रभावित हो सकती है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में कहा कि पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम क्षेत्र है और सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। वहीं तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया कि भारत के पास पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति के विकल्प मौजूद हैं और फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
आम लोगों पर भी दिखने लगा तनाव
हालांकि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर आम लोगों पर भी दिखने लगा है। हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹60 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत करीब ₹913 हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा चलता है तो इसका असर महंगाई और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें: होली का रंग बना खून! 50 साल पुरानी दुश्मनी ने ली जान, उत्तम नगर हत्याकांड में बड़ा खुलासा

