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रिकॉर्ड के बाद फिसली चांदी! क्या टूटने वाला है बुल रन, या ये सिर्फ तूफान से पहले की शांति?

Gold Silver Ratio: लगातार ऊंचाइयों को छूने के बाद अब चांदी की कीमतों में तेज फिसलन देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी अपने ऑलटाइम हाई से नीचे आ चुकी है, जिससे निवेशकों के बीच हलचल तेज हो गई है। सवाल यही है क्या चांदी ने अपना टॉप बना लिया है, या यह सिर्फ अस्थायी करेक्शन है?

रिकॉर्ड से 5.5% नीचे फिसली कीमत

बीते हफ्ते चांदी ने 93.70 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था, लेकिन इसके बाद इसमें बिकवाली का दबाव बढ़ गया। शुक्रवार को COMEX पर चांदी 88.537 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई, जो एक ही दिन में करीब 4% से ज्यादा की गिरावट है। कुल मिलाकर चांदी अपने उच्चतम स्तर से करीब 5.5% नीचे आ चुकी है, जिससे बाजार में टॉप बनने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

गिरावट की वजह क्या है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर में मजबूती, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और अमेरिका के बेहतर बेरोजगारी आंकड़ों ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी आने से सुरक्षित निवेश की मांग भी कुछ कमजोर हुई है।

SEBI-रजिस्टर्ड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता का कहना है कि चांदी पर दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह CME द्वारा मार्जिन बढ़ाना भी है। जनवरी और फरवरी 2026 के सिल्वर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट पर मार्जिन को 45% तक कर दिया गया है, जिससे ऊपरी स्तरों पर नई खरीदारी कम हो सकती है।

क्या फिर दोहराया जाएगा पुराना इतिहास?

मार्केट एक्सपर्ट्स पुराने अनुभवों को देखकर सतर्क हो रहे हैं। 1980 में Hunt Brothers के दौर में चांदी ने ऐतिहासिक उछाल दिखाया था, लेकिन इसके बाद कीमत 49 डॉलर से गिरकर 11 डॉलर तक आ गई थी। इसी तरह 2011 में भी टॉप बनने के बाद चांदी करीब 75% तक टूट गई थी। अब विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इतिहास खुद को दोहराता है, तो इस बार भी बड़ी गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता।

टॉप बनने के संकेत क्या हैं?

Pace 360 के अमित गोयल के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 82 डॉलर प्रति औंस के नीचे टिक जाती है और वहां से तेजी नहीं दिखती, तो माना जाएगा कि टॉप बन चुका है। वहीं, घरेलू बाजार MCX पर अगर कीमत 2,70,000 रुपये प्रति किलो से नीचे बंद होती है, तो मुनाफावसूली का दौर तेज हो सकता है।

गोल्ड-सिल्वर रेशियो दे रहा चेतावनी संकेत

फिलहाल गोल्ड-सिल्वर रेशियो 52 के नीचे आ चुका है, जो बताता है कि सोने की तुलना में चांदी काफी महंगी हो गई है। यह स्थिति आमतौर पर करेक्शन का संकेत देती है, हालांकि अभी बाजार में थोड़ी और तेजी की गुंजाइश बनी हुई है।

निवेशकों के लिए अहम लेवल

विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 82–83 डॉलर प्रति औंस चांदी के लिए मजबूत सपोर्ट जोन है। वहीं 92 डॉलर के ऊपर निकलने पर कीमत 95–100 डॉलर तक भी जा सकती है। MCX पर 2,80,000 से 2,83,000 रुपये सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 2,95,000 रुपये के ऊपर मजबूती आने पर 3,05,000 से 3,20,000 रुपये तक की तेजी संभव है।

क्या करें निवेशक?

कुल मिलाकर चांदी के बाजार में आने वाले दिनों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि बिना जल्दबाजी के सोच-समझकर कदम उठाएं, क्योंकि अगला बड़ा मूव किसी भी दिशा में जा सकता है।

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