Indian Rupee Record Low 2026: शेयर बाजार की तेजी के बीच भारतीय मुद्रा बाजार से चिंताजनक संकेत सामने आए हैं। रुपये ने ऐतिहासिक गिरावट दर्ज करते हुए पहली बार डॉलर के मुकाबले 93 का स्तर पार कर लिया है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचाई पर हैं और विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
पहली बार 93 के पार पहुंचा डॉलर
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.92 के स्तर पर खुला, लेकिन जल्द ही गिरकर 93.08 तक पहुंच गया। इससे पहले यह 92.89 पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली ने रुपये पर जबरदस्त दबाव बनाया है। हालांकि, घरेलू शेयर बाजार में आई थोड़ी मजबूती ने गिरावट को और गहरा होने से कुछ हद तक रोका।
डॉलर मजबूत, रुपया कमजोर
डॉलर इंडेक्स में भी मजबूती देखने को मिली है, जो प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को दर्शाता है। यह बढ़कर 100.25 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। एक दिन पहले जहां यह 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, वहीं अब इसमें कुछ नरमी देखी गई है।
शेयर बाजार में राहत
घरेलू शेयर बाजार ने गिरावट के बाद जोरदार वापसी की। सेंसेक्स में करीब 960 अंकों की तेजी आई, जबकि निफ्टी भी 300 से ज्यादा अंक चढ़ा। लेकिन इसके बावजूद विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर दिख रहा है। हाल ही में उन्होंने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जिससे बाजार पर दबाव बना हुआ है।
आम आदमी पर सीधा असर
रुपये की गिरावट का सबसे बड़ा असर आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है।
पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं
इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान की कीमतें बढ़ेंगी
विदेश यात्रा और पढ़ाई का खर्च बढ़ेगा
यानी, डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने का मतलब है कि देश में इंपोर्टेड महंगाई बढ़ेगी।
वैश्विक तनाव बना बड़ी वजह
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल आपूर्ति में बाधा ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यूरोप और जापान जैसे देश अब इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रयासों में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, अमेरिका भी तेल सप्लाई बढ़ाने के विकल्प तलाश रहा है।
आगे क्या?
विशेषज्ञों के अनुसार, निकट भविष्य में रुपये पर दबाव कम होने की संभावना नहीं है। मार्च महीने में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की है, जो हाल के समय की सबसे बड़ी बिकवाली में से एक है। लगातार बढ़ती ऊर्जा कीमतें भारत की आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं और महंगाई को और तेज कर सकती हैं। साफ संकेत हैं कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में महंगाई और रुपये दोनों पर दबाव बना रह सकता है।
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