Global Market News: मिडिल ईस्ट में भारी तनाव के बीच बुधवार को साउथ कोरिया के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई है। यहां तक डॉलर के मुकाबले साउथ कोरिया की करंसी वॉन में भारी गिरावट देखने को मिला है। बता दें कि साउथ कोरिया अपनी ऊर्जा खपत के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। यहां तक तेल का आयात भी बाधित हुआ है। इसका असर यहां के बाजार पर देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ कोरिया की लगभग 70% तेल खरीद मध्य पूर्व से होती है। बाजार में भारी बिकवाली से देश का बड़ा इंडेक्स KOSPI करीब 10% तक गिर गया। गिफ्ट निफ्टी में करीब 550 प्वाइंट की भारी गिरावट आई। हालात इतने बिगड़े कि एक्सचेंज को ट्रेडिंग रोकने के लिए सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा। वहीं, करंसी वॉन पहली बार 2009 के बाद डॉलर के मुकाबले 1500 के स्तर के पार पहुंच गया है।
2009 के बाद दक्षिण कोरियाई वॉन हुआ सबसे कमजोर
दक्षिण कोरिया की करेंसी कोरियाई वॉन (KRW) में बड़ी गिरावट आई है और यह डॉलर के मुकाबले 1500 के स्तर के पार पहुंच गई है। यह स्तर बेहद अहम माना जाता है क्योंकि आखिरी बार ऐसा 2009 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान देखने को मिला था।
करंसी कमजोर होने से निवेशकों का भरोसा कम होता है
दक्षिण कोरिया तेल का बड़ा आयातक देश है। यानी अगर तेल महंगा होगा तो वहां की कंपनियों की लागत बढ़ेगी और मुनाफा कम हो सकता है। किसी देश की करेंसी जब इस तरह कमजोर होती है तो इसका मतलब होता है कि उस देश से पूंजी बाहर जा रही है, निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है या डॉलर बहुत ज्यादा मजबूत हो गया है। दक्षिण कोरिया एशिया की बड़ी निर्यात आधारित अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यहां की अर्थव्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी निर्यात पर काफी निर्भर है। ऐसे में करेंसी में इतनी तेज कमजोरी यह संकेत देती है कि वैश्विक बाजारों में जोखिम की भावना बढ़ रही है।
भारत समेत एशियाई बाजारों के लिए क्या है संकेत?
कोरियाई वॉन को अक्सर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का “सेंटिमेंट इंडिकेटर” माना जाता है. जब वॉन तेजी से गिरता है तो इसका मतलब होता है कि विदेशी निवेशक एशिया से पैसा निकाल रहे हैं। इसका असर सिर्फ कोरिया तक सीमित नहीं रहता बल्कि जापान, ताइवान, भारत और उभरते एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है । ऐसी स्थिति में आमतौर पर तीन चीजें देखने को मिलती हैं। पहली बात की डॉलर मजबूत होता है। दूसरी बात की एशियाई करेंसी कमजोर होती हैं और तीसरी बता यह कि शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ता है।
सेंसेक्स में 1700 अंकों की भारी गिरावट
भारतीय शेयर बाजारों में आज 4 मार्च को लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1700 अंकों से भी अधिक टूट गया। वहीं निफ्टी 530 अंकों का गोता लगाकर 24,400 के भी नीचे चला गया। इस भारी गिरावट ने निवेशकों के होली के रंग में भंग डाल दिया है। महज कुछ मिनटों में ही निवेशकों की करीब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति साफ हो गई। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 456.90 लाख करोड़ से घटकर 446.45 लाख करोड़ पर आ गया।
ये भी पढ़ें: खामेनेई के बेटे मोजतबा हुसैनी चुने गए ईरान के नए सुप्रीम लीडर: रिपोर्ट

