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ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने बढ़ाई हथियारों की खरीद, घरेलू प्रोडक्शन में भी हुआ इजाफा

India arms import 2026: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत अब विश्व के शीर्ष हथियार आयातकों में शामिल है। वैश्विक हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत रही, जिससे यह रूस और अमेरिका के बाद दूसरे सबसे बड़े आयातक देश के रूप में उभरा। केवल युद्धग्रस्त यूक्रेन ने भारत से अधिक हथियार आयात किया, जिसकी हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत रही।

आयात में कमी और घरेलू उत्पादन में वृद्धि

एसआईपीआरआई के आंकड़े बताते हैं कि भारत ने पिछले वर्षों में अपनी रक्षा आयात में क्रमिक कमी की है और घरेलू एवं स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया है। 2019 से 2023 के बीच भारत की वैश्विक हथियार आयात में हिस्सेदारी लगभग 9.8 प्रतिशत थी, जो कि अब घटकर 8.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि भारत अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के साथ-साथ आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की ओर बढ़ रहा है।

हथियार आपूर्तिकर्ताओं का बदलता परिदृश्य

आंकड़ों के अनुसार, रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता है और आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 29 प्रतिशत हो गई है। यह वृद्धि विशेष रूप से राफेल लड़ाकू विमानों के बड़े सौदों के कारण हुई है। भारत और फ्रांस पहले से ही भारतीय वायु सेना के लिए 114 राफेल विमानों की खरीद के समझौते पर काम कर रहे हैं, जिससे निकट भविष्य में फ्रांस से आयात और बढ़ने की संभावना है।

इजराइल का बढ़ता प्रभाव

भारत के हथियार आयात में इजराइल की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है। भारत और इजराइल ने मिसाइलों, ड्रोन और निगरानी प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाया है। इसके चलते इजराइल भारत के आयात मिश्रण में तीसरे सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है।

रूस की प्रमुखता में कमी

फ्रांस और इजराइल के बढ़ते प्रभाव के कारण रूस की प्रमुख स्थिति कमजोर हुई है। एसआईपीआरआई के पिछले विश्लेषण बताते हैं कि 2010 के दशक की शुरुआत में भारत के आयात का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रूस से आता था। समय के साथ, नई दिल्ली ने खरीद में विविधता लाई और कई देशों के साथ रक्षा साझेदारी का विस्तार किया।

आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा

नवीनतम आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारत अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के साथ-साथ स्वदेशी विनिर्माण और प्रौद्योगिकी साझेदारी के माध्यम से आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। रक्षा उत्पादन में यह संतुलन भारत की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है।

वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य का प्रभाव

वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण हथियार व्यापार का परिदृश्य बदल गया है। पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को प्रदान की गई सैन्य सहायता के चलते यूक्रेन ने वैश्विक हथियार आयात में शीर्ष स्थान हासिल किया। ऐसे में भारत की आयात नीति में विविधता और स्वदेशी उत्पादन की पहल और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

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