Delhi-Varanasi Bullet Train: दिल्ली से बनारस का यात्रा समय अब आधे समय में पूरा होने वाला है। रेलवे बोर्ड ने दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। वर्तमान में यह सफर 8 से 12 घंटे में पूरा होता है, लेकिन नए बुलेट ट्रेन रूट पर काम शुरू होने के बाद यह केवल 4 घंटे में तय हो जाएगा। अगर योजना अनुसार सब कुछ हुआ, तो अगले 2-3 महीनों में जमीनी निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
देश की रफ्तार बढ़ाने की योजना
सरकार ने देश में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया है। हालिया बजट में वित्त मंत्री ने इन परियोजनाओं के लिए 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान जताया था। इन कॉरिडोरों पर ट्रेनें 250-350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी, जिससे महानगरों की दूरी काफी कम हो जाएगी और लोगों का यात्रा अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।
क्या है दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर को प्राथमिकता?
दिल्ली-वाराणसी रूट पर काम सबसे पहले शुरू करने की तैयारी है। नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने इसके लिए क्षेत्रीय कार्यालय बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस रूट को प्राथमिकता देने के पीछे राजनीतिक और लोकहित कारण भी हैं। 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है। इस वजह से आम जनता को लाभ पहुंचाने वाले इस प्रोजेक्ट को पहले शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन रूट: कौन-कौन से शहरों से गुजरेगी
840 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाले इस रूट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) रेलवे बोर्ड को सौंप दी गई है।
रूट विवरण
• दिल्ली के सराय काले खां से शुरुआत
• गुजरने वाले प्रमुख स्टेशन: नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, लखनऊ, प्रयागराज
• अंतिम स्टेशन: वाराणसी
इस रूट पर कुल 13-14 स्टेशन बनाए जाएंगे। निर्माण लागत और सटीक मार्ग तय करने के लिए लेजर तकनीक (LiDAR) से सर्वे किया जा रहा है।
रेलवे बोर्ड का कड़ा निर्देश
रेलवे बोर्ड ने सभी सात कॉरिडोर के काम में तीव्रता लाने के निर्देश दिए हैं।
• भूमि अधिग्रहण, डिजाइन और टेंडर जैसी पूर्वनिर्माण गतिविधियों को जल्दी पूरा करने को कहा गया है।
• सात में से छह कॉरिडोर की रिपोर्ट तैयार है, जबकि वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर का सर्वे तेजी से किया जा रहा है।
• अब हर हफ्ते परियोजना प्रगति रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपनी होगी।
तकनीकी मानक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
सभी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए समान तकनीकी मानक रखे जाएंगे। इसके लिए रेलवे कर्मचारियों और तकनीकी स्टाफ का प्रशिक्षण और आकलन किया जा रहा है। रेलवे बोर्ड इस बात पर भी निर्णय लेगा कि इन परियोजनाओं में जर्मनी, फ्रांस या रूस में से किस देश की तकनीक का इस्तेमाल होगा।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन यात्रियों का समय बचाएगी, यात्रा अनुभव को आसान और सुरक्षित बनाएगी, और उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी नई रफ्तार देगी।
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