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मिडिल ईस्ट में टेंशन के बीच रूसी तेल खरीद में इजाफा, भारत प्रतिदिन खरीद रहा इतना क्रूड ऑयल

India Russia oil imports: मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक होरमुज़ जलसंधि में अनिश्चितता के कारण भारत अपनी ऊर्जा रणनीति में तेजी से बदलाव कर रहा है। खाड़ी क्षेत्र से आने वाली तेल खेपों में देरी और संभावित व्यवधान को देखते हुए भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है, ताकि घरेलू ऊर्जा जरूरतों को स्थिर रखा जा सके।

रूस से कच्चे तेल की खरीद में तेज वृद्धि

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के चलते भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने का फैसला किया है। जहाजों की निगरानी से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मार्च महीने में रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत ने मार्च में प्रतिदिन करीब 15 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा, जबकि फरवरी में यह आंकड़ा लगभग 14 लाख बैरल प्रतिदिन था। यानी एक महीने में आयात में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आपूर्ति में संभावित संकट को टालने के लिए उठाया गया है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है।

अमेरिका की अस्थायी छूट से मिली राहत

भारत द्वारा रूस से तेल खरीद बढ़ाने का फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत को प्रतिबंधों के बावजूद रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। इस छूट का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और भारत जैसे बड़े आयातक देशों को मध्य पूर्व संकट के कारण उत्पन्न आपूर्ति संकट से बचाना है। इससे भारत को वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा आयात जारी रखने में मदद मिली है।

भारत की भारी ऊर्जा निर्भरता

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। देश में प्रतिदिन लगभग 58 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। इसमें से करीब 88 प्रतिशत जरूरत आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। अब तक भारत अपनी अधिकांश ऊर्जा आपूर्ति के लिए सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे मध्य पूर्वी देशों पर निर्भर रहा है। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति मार्गों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व

खाड़ी क्षेत्र से आने वाले अधिकांश तेल टैंकर होरमुज़ जलसंधि से होकर गुजरते हैं। यह एक संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए भारत के लिए प्रतिदिन लगभग 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल कच्चा तेल पहुंचता है। यह मार्ग भारत के ऊर्जा आयात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी रास्ते से देश में आने वाली खाना पकाने की गैस का लगभग 55 प्रतिशत और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का करीब 30 प्रतिशत आयात भी होता है। ये दोनों ऊर्जा स्रोत बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण और घरेलू रसोई गैस के लिए बेहद जरूरी हैं।

विश्लेषकों की चेतावनी

ऊर्जा बाजार के विश्लेषकों के अनुसार रूस से आयात बढ़ाने से कच्चे तेल की आपूर्ति में आने वाली कमी को कुछ हद तक संभाला जा सकता है। हालांकि अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो एलपीजी आपूर्ति के मोर्चे पर भारत को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

भारत प्रतिदिन करीब 10 लाख बैरल एलपीजी की खपत करता है, लेकिन घरेलू उत्पादन से केवल 40 से 45 प्रतिशत मांग ही पूरी हो पाती है। बाकी 55 से 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करना पड़ता है, और इसका बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्षेत्रीय अस्थिरता जारी रहती है, तो भारत को ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक विकल्प तलाशने होंगे।

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