US attacked Kharg Island: फारस की खाड़ी में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के छोटे आइलैंड खर्ग में मौजूद सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगला निशाना ईरान का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर हो सकता है, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस बयान ने फारस खाड़ी क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
2500 सैनिकों तैनात किए गए
करीब 2,500 अमेरिकी मरीन सैनिकों और एक युद्धपोत को पश्चिम एशिया की ओर रवाना कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को तत्काल पश्चिम एशिया जाने का आदेश मिला है। इस तैनाती से इलाके में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी बढ़ जाएगी और संकेत मिल रहे हैं कि तनाव जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। हालांकि, ट्रंप का दावा है कि ईरान जल्द ही “सरेंडर” करने की स्थिति में पहुंच सकता है।
खर्ग आइलैंड ईरान के लिए क्यों जरूरी है?
खर्ग आइलैंड फ़ारस की खाड़ी में ईरानी तट से करीब 33 किलोमीटर दूर स्थित है और इसे ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र माना जाता है। देश के लगभग 90% कच्चे तेल का भंडारण और निर्यात यहीं से होता है, इसलिए यह ईरान की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस द्वीप पर विशाल ऑयल टर्मिनल, पाइपलाइन नेटवर्क और बड़े-बड़े स्टोरेज टैंक बने हुए हैं, जिनसे तेल दुनिया के कई देशों तक भेजा जाता है। द्वीप के दक्षिणी हिस्से में निर्यात से जुड़ा मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है और यहां हजारों कर्मचारियों के रहने व काम करने की भी व्यवस्था की गई है।
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