Tirumala News: दक्षिण भारत के प्रमुख पर्वों में शामिल उगादि (तेलुगु नववर्ष) को लेकर आंध्र प्रदेश के तिरुमाला स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में तैयारियां शुरू हो गई हैं। उगादि के अवसर पर आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रमों को देखते हुए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने 19 मार्च को होने वाले उगादि अस्थानम के लिए मंदिर की दर्शन व्यवस्था और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ी अहम जानकारी जारी की है।
उत्सव की परंपरा के अनुसार मंदिर परिसर की विशेष शुद्धि की जाएगी। इसी क्रम में टीटीडी द्वारा 17 मार्च (मंगलवार) को कोइल अलवर थिरुमंजनम अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा। शुद्धिकरण प्रक्रिया और उगादि पर्व के कारण मंदिर में सामान्य दर्शन व्यवस्था में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। 17 मार्च को होने वाले कोइल अलवर थिरुमंजनम के चलते उस दिन वीआईपी दर्शन पूरी तरह से बंद रहेंगे।
इसके अलावा 16 मार्च को भी वीआईपी दर्शन के लिए किसी प्रकार का सिफारिश पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल प्रोटोकॉल श्रेणी में आने वाले गणमान्य व्यक्तियों को ही दर्शन की अनुमति दी जाएगी। वहीं 19 मार्च को उगादि के मुख्य उत्सव के दिन भी प्रोटोकॉल के अंतर्गत आने वाले विशिष्ट लोगों को छोड़कर अन्य सभी वीआईपी दर्शन पर रोक रहेगी। इसके लिए 18 मार्च को भी कोई सिफारिश पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्या है उगादि का महत्व?
उगादि का पर्व मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में हिंदू चंद्र कैलेंडर के चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। तिरुमाला जैसे प्रमुख मंदिरों में इस दिन पंचांग श्रवणम और अस्थानम जैसे विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
उगादि के दिन भक्त पारंपरिक व्यंजन ‘उगादि पचड़ी’ का सेवन करते हैं, जो नीम, गुड़, इमली और कच्चे आम जैसी सामग्रियों से तैयार किया जाता है। यह व्यंजन जीवन में आने वाले विभिन्न अनुभवों खुशी और कठिनाइयों के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
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