IndiGo CEO resignation: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीटर एल्बर्स ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। एयरलाइन का संचालन इंटर ग्लोब एविएशन लिमिटेड करती है। कंपनी ने बताया कि एल्बर्स ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है। उनके इस्तीफे के बाद कंपनी के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने अंतरिम रूप से एयरलाइन का प्रबंधन संभाल लिया है।
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब एयरलाइन को दिसंबर 2025 में आए एक बड़े परिचालन संकट के कारण काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था। उस समय बड़ी संख्या में उड़ानों के रद्द और देरी से चलने के कारण लाखों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी थी।
इस्तीफे में क्या कहा पीटर एल्बर्स ने
अपने इस्तीफे पत्र में एल्बर्स ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने का निर्णय लिया है और कंपनी से अनुरोध किया है कि उनकी नोटिस अवधि को माफ किया जाए। उन्होंने अपने कार्यकाल को याद करते हुए लिखा कि सितंबर 2022 से इंडिगो के सीईओ के रूप में काम करना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात रही है।
एल्बर्स ने कहा कि इंडिगो के परिवार का हिस्सा बनना और एयरलाइन की विकास यात्रा में योगदान देना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस अवधि में कंपनी के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की गईं, जिनसे इंडिगो की वैश्विक और घरेलू विमानन बाजार में स्थिति और मजबूत हुई।
एल्बर्स के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां
सितंबर 2022 में सीईओ का पद संभालने के बाद एल्बर्स ने एयरलाइन के विस्तार और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में इंडिगो ने कई बड़े लक्ष्य हासिल किए। कंपनी का वार्षिक राजस्व 10 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया, जो एयरलाइन के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके साथ ही इंडिगो ने अपने विमान बेड़े का भी तेजी से विस्तार किया।
एल्बर्स के कार्यकाल के दौरान एयरलाइन के बेड़े में 440 से अधिक विमान शामिल हो गए। इसके अलावा कंपनी ने एयरबस ए320 परिवार के 500 विमानों के लिए एक ऐतिहासिक ऑर्डर भी दिया, जिसे विमानन क्षेत्र में एक बड़ा सौदा माना गया। इन कदमों ने इंडिगो को भारत के विमानन बाजार में और अधिक मजबूत स्थिति में पहुंचाने में मदद की।
दिसंबर 2025 का उड़ान संकट
हालांकि एल्बर्स का कार्यकाल कई उपलब्धियों से भरा रहा, लेकिन दिसंबर 2025 में आए एक बड़े परिचालन संकट ने एयरलाइन की छवि को नुकसान पहुंचाया। यह संकट उस समय पैदा हुआ जब कंपनी ने पायलटों की थकान को कम करने के लिए नए नियम लागू करने की कोशिश की। इन नियमों को लागू करने में आई कठिनाइयों के कारण उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ।
3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो को 2,500 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि लगभग 1,900 उड़ानों में देरी हुई। इस वजह से करीब तीन लाख यात्रियों की यात्रा प्रभावित हुई और एयरलाइन को व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा।
नियामक कार्रवाई और प्रतिष्ठा पर असर
इस संकट के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय डीजीसीए ने एयरलाइन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। नियामक ने एल्बर्स पर ₹22.20 करोड़ का रिकॉर्ड जुर्माना लगाया और उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। हालांकि उस समय उनके इस्तीफे की मांग को कंपनी ने नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन इस घटना ने समय की पाबंदी के लिए प्रसिद्ध इंडिगो की प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचाया।

