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SC-ST ऐक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, धर्म परिवर्तन के साथ ही खत्म हो जाएगा अनुसूचित जाति-जनजाति का दर्जा

Supreme Court Major Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति से संबंधित है और वह हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करता है, तो उसका अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाएगा।

आंध्र प्रदेश कोर्ट के फैसले को SC ने रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर ईसाई या इस्लाम जैसे किसी अन्य धर्म को अपनाता है और उसका सक्रिय रूप से पालन करता है, तो वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं माना जाएगा।

जज की बेंच ने क्या कहा?

जस्टिस पीके मिश्रा और एनवी अंजारिया की बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन के साथ ही अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त हो जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह नियम केवल सामाजिक और संवैधानिक दृष्टि से लागू होता है।

ईसाई धर्म अपने पर खत्म हुए एससी-एसटी दर्ज

इस मामले में अपीलकर्ता ने करीब एक दशक तक ईसाई धर्म का पालन किया, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने माना कि वह अब अनुसूचित जाति का दर्जा पाने के हकदार नहीं है और SC/ST एक्ट 1989 के तहत संरक्षण का दावा भी नहीं कर सकता। कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन करने पर अनुसूचित जाति से जुड़े आरक्षण और अन्य लाभ स्वतः समाप्त हो जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्णय सामाजिक संरचना और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप बताया। कोर्ट के अनुसार, अनुसूचित जाति का दर्जा उन समुदायों के लिए निर्धारित है जो पारंपरिक रूप से हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से जुड़े रहे हैं, इसलिए किसी अन्य धर्म को अपनाने पर यह दर्जा स्वतः खत्म हो जाता है। इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति की सरकारी पहचान और लाभों में बदलाव होगा।

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