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राजपाल यादव को मिली अंतरिम जमानत, इतने करोड़ की जमा करवाई DD

Rajpal Yadav Gets Bail: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) लंबे समय से चल रहे चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं। गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका की सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने राहत देने से साफ इनकार कर दिया। अभिनेता ने शाहजहांपुर जाकर अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए जमानत की मांग की थी, जो 19 फरवरी को होने वाली है। वहीं अब सुनवाई की अगली तारीख 16 फरवरी सोमवार तय हुई है। फैंस की निगाहें इस फैसले पर टिकी हैं कि क्या राजपाल यादव को जमानत मिलेगी। सुनवाई लगभग 3 बजे से शुरू हो सकती है। इस बीच अभिनेता के लिए अभिनेता Sonu Sood ने सोशल मीडिया पर फिर से पोस्ट लिखकर उनका समर्थन किया है।

क्या है मामला

राजपाल यादव ने 2010 में अपनी डायरेक्टोरियल फिल्म ‘अता-पता लापता’ बनाने के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई, जिसके चलते भुगतान में देरी हुई और कई चेक बाउंस हो गए। इसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अदालत ने कई अवसर दिए, लेकिन भुगतान न करने पर उन्हें नोटिस जारी किया और 4 फरवरी 2026 को आत्मसमर्पण का आदेश दिया गया।

कोर्ट की शर्तें और अगली सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में 18 मार्च तक अंतरिम जमानत दी है। शिकायतकर्ता के खाते में 1.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं और अदालत को इसकी जानकारी दी गई। कोर्ट ने अभिनेता का पासपोर्ट जमा करने का निर्देश भी दिया है। अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी, जिसमें उन्हें या तो फिजिकली या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होना जरूरी होगा। वहीं उनकी भतीजी की शादी 19 फरवरी को शाहजहांपुर में होने वाली है।

पहले भी जेल गए थे

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, फिल्म निर्माण के लिए लिया गया 5 करोड़ रुपये का कर्ज समय पर चुकाया नहीं गया, जिससे अदालत ने सख्त रुख अपनाया। साल 2018 में अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया और तिहाड़ जेल भेजा। 6 फरवरी 2026 को अदालत ने उन्हें दोबारा तिहाड़ जेल में सरेंडर करने का आदेश दिया। कॉमिक अभिनेता होने के बावजूद यह घटना फिल्म इंडस्ट्री के लिए चौंकाने वाली रही।

कानूनी जटिलताएं

2010 में लिए गए कर्ज की वजह से सात चेक बाउंस हो गए। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को धारा 138 के तहत दोषी ठहराया और छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई। 2019 में सेशन कोर्ट ने फैसला बरकरार रखा। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दायर की गई, लेकिन केवल सीमित राहत ही मिली। इस दौरान बकाया राशि में इंटरेस्ट जुड़कर कुल कर्ज बढ़कर 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

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