Avimukteshwaranand Bail: सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज के चर्चित POCSO मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इसके साथ ही ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मिली राहत फिलहाल बरकरार रहेगी। मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है।
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने मामले की सुनवाई की। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने वकील सौरभ अजय गुप्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि हाई कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस सुंदरेश ने शिकायतकर्ता पक्ष से पूछा कि अगर उन्हें नाबालिगों के कथित शोषण की जानकारी पहले से थी, तो पुलिस के पास जाने में देरी क्यों हुई। हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश में इस पहलू का जिक्र किया था। कोर्ट ने कहा था कि पीड़ितों द्वारा अपने अभिभावकों के बजाय किसी अन्य व्यक्ति को घटना की जानकारी देना असामान्य व्यवहार माना जा सकता है।
6 दिन की देरी पर हाई कोर्ट की टिप्पणी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने विस्तृत आदेश में कहा था कि पीड़ितों ने 18 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता को घटना की जानकारी दी थी, लेकिन पुलिस को इसकी सूचना 24 जनवरी को दी गई। शिकायतकर्ता ने देरी की वजह पूजा और यज्ञ में व्यस्त होना बताया था।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया था कि इसी दौरान शिकायतकर्ता ने 21 जनवरी को एक अन्य मामले में अलग याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया, जिसमें POCSO एक्ट की धारा 29 के तहत आरोपी के खिलाफ कानूनी धारणा लागू होने की बात कही गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान आरोप तय होने से पहले लागू नहीं किया जा सकता।
मीडिया कवरेज पर भी कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने मामले में मीडिया की भूमिका पर भी नाराजगी जताई थी। कोर्ट का कहना था कि संवेदनशील मामलों में रिपोर्टिंग के दौरान संतुलन और सावधानी बेहद जरूरी है। फिलहाल मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
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