बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पटना की MP-MLA कोर्ट से राहत मिल गई है। मंगलवार को कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। हालांकि, इसके बावजूद वे फिलहाल बेऊर जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। सांसद बीते तीन दिनों से न्यायिक हिरासत में थे।
दोपहर करीब 12:30 बजे उन्हें सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश किया गया, जहां करीब 2 बजे से जमानत याचिका पर बहस शुरू हुई। इस दौरान पप्पू यादव व्हीलचेयर पर नजर आए। उनकी गिरफ्तारी 31 साल पुराने एक मामले में हुई थी।
जमानत के बावजूद जेल में क्यों हैं पप्पू यादव?
गर्दनीबाग थाने से जुड़े मामले में भले ही सांसद को जमानत मिल गई हो, लेकिन पुलिस ने उन्हें दो अन्य मामलों में रिमांड पर लिया है। इनमें एक मामला सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़ा बताया जा रहा है। गिरफ्तारी के समय पप्पू यादव और उनके समर्थकों के बीच करीब दो घंटे तक तीखी नोकझोंक भी हुई थी।
क्या है 1995 का मामला?
यह पूरा विवाद गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़े एक पुराने झगड़े से संबंधित है। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल का आरोप है कि सांसद ने उनकी संपत्ति को धोखे से किराए पर लिया और बाद में उसे अपने कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया। उनका दावा है कि किरायानामा करते समय इस बात को छिपाया गया था।
“मुझे मारने की साजिश हो रही है”
पप्पू यादव ने गिरफ्तारी से पहले बयान दिया था कि यह सब उन्हें नुकसान पहुंचाने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने कहा था कि वह रात में कहीं नहीं जाएंगे और कोर्ट में पेश होने को तैयार हैं। सांसद के अनुसार, अदालत ने उन्हें शनिवार को पेश होने का निर्देश दिया था।
देर रात हुई गिरफ्तारी
लोकसभा सत्र समाप्त होने के बाद पप्पू यादव पटना पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि वह शनिवार सुबह 11 बजे कोर्ट में हाजिर होने वाले थे। इसके बावजूद पुलिस ने शुक्रवार देर रात करीब 12:30 बजे, सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए IGIMS ले जाया गया।
पुलिस का पक्ष
सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि पूरी कार्रवाई कोर्ट के आदेश के तहत की गई। उनके मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ वारंट या अटैचमेंट का आदेश होता है तो पुलिस किसी भी समय गिरफ्तारी कर सकती है, बस तय प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है।
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