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NASA Satellite Crash: 14 साल बाद धरती की ओर लौट रहा 600 किलो का सैटेलाइट, वैज्ञानिक लगातार रख रहे नजर

by | Mar 10, 2026 | Breaking, News Latest

NASA Satellite Crash: अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पुराना सैटेलाइट अब अपना मिशन पूरा करने के बाद धरती की ओर लौट रहा है। करीब 14 वर्षों से पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा लगभग 600 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट जल्द ही वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसके अधिकांश हिस्से वायुमंडल में जल जाएंगे और पृथ्वी पर किसी तरह के बड़े नुकसान की संभावना बेहद कम बताई जा रही है।

कब और कैसे धरती पर आएगा सैटेलाइट

नासा के मुताबिक यह सैटेलाइट वर्ष 2012 में अपने दूसरे साथी सैटेलाइट के साथ लॉन्च किया गया था। इसका नाम वैन एलन प्रोब A रखा गया था, जिसे पृथ्वी के चारों ओर मौजूद रेडिएशन बेल्ट का अध्ययन करने के लिए भेजा गया था।

रिपोर्ट के अनुसार यह सैटेलाइट 10 मार्च की रात (भारतीय समयानुसार 11 मार्च तड़के) पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों ने इसके लिए करीब 24 घंटे की समय सीमा तय की है, यानी इसके गिरने का सटीक समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।

क्या किसी को नुकसान होने का खतरा है

नासा के अधिकारियों का कहना है कि जब यह सैटेलाइट वायुमंडल में प्रवेश करेगा तो इसका अधिकांश हिस्सा घर्षण के कारण जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि इसके कुछ छोटे हिस्सों के बचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फिर भी वैज्ञानिकों के मुताबिक किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचने की संभावना बेहद कम है। अनुमान के अनुसार यह जोखिम लगभग 4,200 में से 1 यानी करीब 0.02 प्रतिशत के आसपास है।

धरती की सतह का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है, इसलिए अगर इसके कुछ टुकड़े बच भी जाते हैं तो उनके खुले समुद्र में गिरने की अधिक संभावना है।

सटीक स्थान बताना क्यों मुश्किल

वैज्ञानिकों का कहना है कि सैटेलाइट की तेज गति और बदलती कक्षा के कारण यह बताना मुश्किल होता है कि वह ठीक किस स्थान पर गिरेगा। हालांकि नासा और अमेरिकी स्पेस फोर्स लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं।

यह सैटेलाइट पृथ्वी के चारों ओर गोल कक्षा में नहीं बल्कि अंडाकार रास्ते पर घूम रहा था। इस वजह से कभी यह पृथ्वी से काफी दूर चला जाता था और कभी काफी करीब आ जाता था।

जब यह सबसे दूर होता था तब इसकी दूरी पृथ्वी से लगभग 30,415 किलोमीटर तक पहुंच जाती थी, जबकि सबसे करीब आने पर यह करीब 618 किलोमीटर की ऊंचाई पर आ जाता था।

रेडिएशन बेल्ट्स की स्टडी के लिए भेजा गया था मिशन

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के चारों ओर मौजूद रेडिएशन बेल्ट्स का अध्ययन करना था। पृथ्वी के आसपास ऊर्जा से भरे कणों की दो बड़ी परतें होती हैं, जिन्हें वैन एलन बेल्ट कहा जाता है।

अंडाकार कक्षा की वजह से यह सैटेलाइट बार-बार इन रेडिएशन परतों के अंदर और बाहर जाता था, जिससे वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष मौसम और सूर्य से आने वाली ऊर्जा का पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने में मदद मिली।

शुरुआत में इस मिशन का नाम Radiation Belt Storm Probes रखा गया था, लेकिन बाद में इन परतों की खोज करने वाले वैज्ञानिक जेम्स वैन एलन के सम्मान में इसका नाम बदलकर Van Allen Probes कर दिया गया।

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