होम = Breaking = दिल्ली में चुनाव कराओ, अगर बीजेपी 10 से ज्यादा सीटें जीतती है तो मैं राजनीति छोड़, अरविंद केजरीवाल का चैलेंज

दिल्ली में चुनाव कराओ, अगर बीजेपी 10 से ज्यादा सीटें जीतती है तो मैं राजनीति छोड़, अरविंद केजरीवाल का चैलेंज

Delhi Political News: दिल्ली आबकारी नीति मामले में दोषमुक्त होने के कुछ ही घंटों बाद पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को खुली चुनौती दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली में दोबारा चुनाव कराए जाएं और भाजपा 10 से अधिक सीटें जीत ले, तो वे राजनीति छोड़ देंगे।

अदालत का फैसला

शुक्रवार को राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करने में असफल रहा। केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने दावा किया था कि 2021-22 की नई आबकारी नीति के निर्माण में व्यापक अनियमितताएं हुईं और इससे कुछ निजी खिलाड़ियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

हालांकि अदालत ने माना कि कथित आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप न्यायिक जांच में टिक नहीं पाए। इसी के साथ मामले में नामजद सभी 23 आरोपियों, जिनमें पूर्व बीआरएस नेता के. कविता भी शामिल थीं, को राहत मिल गई।

भाजपा पर सीधा आरोप

फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में उनकी पार्टी को सत्ता से हटाने के लिए यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश के तहत गढ़ा गया।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद दिल्ली को नुकसान उठाना पड़ा है और आम जनता इससे परेशान है। केजरीवाल ने कहा कि अगर भाजपा को अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है, तो वह दोबारा चुनाव कराकर जनादेश ले।

चुनावी आंकड़ों का संदर्भ

पिछले विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए केजरीवाल ने याद दिलाया कि उनकी पार्टी ने 2015 और 2020 में भारी बहुमत हासिल किया था। हालांकि 2025 के चुनाव में भाजपा ने 70 में से 48 सीटें जीतकर सरकार बनाई, जबकि आम आदमी पार्टी 22 सीटों तक सिमट गई।

‘राजनीतिक साजिश’ का दावा

आप प्रमुख ने इस पूरे प्रकरण को स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश करार दिया। उनका कहना था कि यदि मामले में दम होता, तो लंबी सुनवाई चलती और पर्याप्त गवाह व साक्ष्य सामने आते। उन्होंने अदालत के विस्तृत आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालय ने पाया कि मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त आधार भी मौजूद नहीं था।

केजरीवाल ने यह भी कहा कि अदालत का काम केवल यह देखना था कि प्रथम दृष्टया मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री है या नहीं, और अदालत ने इसे अपर्याप्त माना।

कानूनी टीम का आभार

अदालत के फैसले को “सत्य की जीत” बताते हुए केजरीवाल ने अपनी कानूनी टीम का धन्यवाद किया, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद न्याय मिला है।

क्या है आबकारी नीति विवाद?

दिल्ली की 2021-22 की उत्पाद शुल्क नीति को लेकर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने आरोप लगाया था कि इसे कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया। जांच एजेंसियों का दावा था कि एक कथित लॉबी ने पार्टी नेताओं को लगभग 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी।

यह विवाद जुलाई 2022 में सामने आया, जब दिल्ली के मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। फरवरी 2023 में मनीष सिसोदिया और मार्च 2024 में केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी, हालांकि बाद में दोनों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई।

राजनीतिक असर

यह मामला 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा बना और भाजपा ने इसे चुनाव प्रचार में जोर-शोर से उठाया। अब अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

केजरीवाल ने स्पष्ट कहा कि देश और संविधान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को व्यक्तिगत प्रतिशोध में नहीं बदलना चाहिए। फैसले के बाद दिल्ली की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।

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