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‘देश की वैश्विक छवि से समझौता नहीं किया जा सकता’, AI समिट में यूथ कांग्रेस को प्रदर्शन पर दिल्ली कोर्ट ने लगाई फटकार

by | Feb 22, 2026 | Breaking, News Big, देश

India AI Impact Summit 2026 protest: दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। कार्यक्रम स्थल पर भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा बिना शर्ट के प्रदर्शन करने के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित और देश की वैश्विक छवि से समझौता नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के आयोजनों को बाधित करने वाली गतिविधियों की गंभीर जांच जरूरी है। अदालत ने कहा कि वैध असहमति और सार्वजनिक अव्यवस्था के बीच स्पष्ट सीमा होती है, जिसे पार नहीं किया जाना चाहिए।

पुलिस हिरासत बढ़ी

अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार चार आईवाईसी कार्यकर्ताओं कृष्णा हरि, कुंदन यादव, अजय कुमार और नरसिम्हा यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी। जज ने कहा कि फिलहाल सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए जांच पूरी होने तक राहत नहीं दी जा सकती। चारों आरोपियों को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सतर्कता और प्रभावी छानबीन आवश्यक है, क्योंकि इससे देश की साख प्रभावित हो सकती है।

कैसे हुआ विरोध प्रदर्शन?

दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने समिट में भाग लेने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया था। वे जैकेट या स्वेटर पहनकर आयोजन स्थल में दाखिल हुए, जिसके अंदर प्रधानमंत्री विरोधी नारे लिखी टी-शर्ट छिपी हुई थीं।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जैकेट हटाकर नारे प्रदर्शित किए और बिना शर्ट के विरोध जताया। इस घटना के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। समिट में प्रधानमंत्री Narendra Modi की मौजूदगी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी के कारण यह मामला और संवेदनशील हो गया।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

विरोध प्रदर्शन के बाद सत्तारूढ़ दल ने कांग्रेस पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश को शर्मिंदा करने का आरोप लगाया। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे युवाओं की आवाज बताया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो संदेश जारी कर कहा कि यह शांतिपूर्ण विरोध था, जिसका उद्देश्य युवाओं की नाराजगी को सामने लाना था। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के जरिए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना को ‘गंदी और नग्न राजनीति’ करार देते हुए कहा कि ऐसे कृत्य अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने देश की छवि को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में विपक्ष की आलोचना की और इसे अनुचित आचरण बताया।

अदालत का संदेश

अदालत की टिप्पणी ने इस पूरे घटनाक्रम को कानूनी आयाम दे दिया है। अदालत ने संकेत दिया कि विरोध का अधिकार संवैधानिक है, लेकिन उसकी सीमाएं भी तय हैं। यदि किसी आयोजन की गरिमा और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा।

अब पुलिस जांच यह तय करेगी कि प्रदर्शन पूर्व नियोजित था या नहीं, और क्या इसमें किसी बड़े राजनीतिक रणनीति का हिस्सा शामिल था। फिलहाल, यह मामला लोकतांत्रिक असहमति और राष्ट्रीय छवि के बीच संतुलन की बहस को फिर से केंद्र में ले आया है।

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