Ahmedabad Air India Plane Crash: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (11 फरवरी) को 12 जून, 2025 को हुई एअर इंडिया विमान दुर्घटना के मामले में केंद्र को अब तक अपनाई गई जांच प्रक्रिया की संक्षिप्त रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। यह निर्देश तब आया जब सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की जांच अपने अंतिम चरण में है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की बेंच ने यह आदेश एयर इंडिया की बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (फ्लाइट AI171) की दुर्घटना से संबंधित तीन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिए। इन याचिकाओं में स्वतंत्र और कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई है।
दुर्घटना में 260 लोगों की मौत
AI171 लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई थी और अहमदाबाद से उड़ान भरने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य समेत कुल 260 लोगों की जान गई, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे।
AAIB जांच अंतिम चरण में
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि AAIB की जांच अंतिम चरण में है और कुछ हिस्से विदेशी एजेंसियों के सहयोग से पूरे किए जाने हैं। उन्होंने तीन सप्ताह का समय मांगते हुए कहा कि याचिकाओं को व्यापक सुनवाई के लिए उसी समय सूचीबद्ध किया जा सकता है।
जांच का विवरण साझा किया जाएगा
कोर्ट ने शुरू में कहा कि AAIB रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाए, लेकिन सॉलिसिटर जनरल ने आश्वासन दिया कि जांच का विवरण जजों के साथ साझा किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि AAIB केवल दुर्घटना के कारणों की जांच करेगा, किसी की मंशा निर्धारित करने का काम नहीं।
एनजीओ की चिंता और सुरक्षा सवाल
सुरक्षा से जुड़े एनजीओ सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इसी तरह के अन्य तीन बोइंग 787 विमानों में भी हादसे हुए हैं और जांच दल में अधिकतर सदस्य DGCA के हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठता है। भूषण ने यह भी कहा कि 8,000 से अधिक पायलट बोइंग 787 को सुरक्षित नहीं मानते और इसे ग्राउंड किया जाना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल ने हँसते हुए कहा कि भूषण जी को संतुष्ट करने का तरीका एक समिति बनाना है, जिसकी अध्यक्षता भूषण खुद करें।
केंद्र और DGCA को पहले भी जारी हो चुका है नोटिस
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर, 2025 को दुर्घटना के पायलट के परिवार की याचिका पर केंद्र और DGCA को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने पहले स्पष्ट किया था कि प्रारंभिक AAIB रिपोर्ट में मृतक पायलट को दोषी नहीं ठहराया गया और मीडिया में प्रकाशित कथित लापरवाही के विवरण गैर-जिम्मेदाराना और चयनात्मक थे।
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